जिस खुली हवा में देश की सवा सौ करोड़ आबादी सांस ले रही है, तरक्की के सपने देख रही है, उसके लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले किस हाल में हैं, इसकी चिंता शायद किसी को नहीं है। झांसी में आजादी का एक ऐसा ही क्रांतिवीर सड़कों पर हाथ फैलाकर भीख मांगने को मजबूर है।