राजधानी में राज्य की पहली मेडिकल सर्विलांस यूनिट (एमएसयू) का उद्घाटन किया गया। यह यूनिट संभावित बीमारियों और संक्रमणों की समय रहते पहचान कर स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट करेगी। किसी भी प्रकोप या आपदा की स्थिति में यूनिट सक्रिय होकर स्थिति का विश्लेषण कर अस्पतालों को सूचित करेगी। देश में इस प्रकार की यूनिट्स अभी केवल 20 शहरों में स्थापित हैं। शिमला में इसकी स्थापना के साथ यह न केवल हिमाचल प्रदेश की पहली, बल्कि पहाड़ी राज्यों की भी पहली मेडिकल सर्विलांस यूनिट बन गई है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलेगी। एमएसयू की स्थापना नेशनल हेल्थ मिशन, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और नगर निगम शिमला के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत की गई है। यूनिट का संचालन नगर निगम शिमला के अधीन रहेगा। वित्त वर्ष 2025-26 में एनसीडीसी से इस परियोजना के लिए लगभग 1.56 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है, जिससे इसे आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। यूनिट के लिए 11 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से चार पदों पर नियुक्ति हो चुकी है। वर्तमान में माइक्रोबायोलॉजिस्ट, पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट, डेटा मैनेजर और कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट तैनात हैं। कॉर्पोरेशन हेल्थ ऑफिसर को यूनिट का प्रभारी बनाया गया है, जबकि अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। शिमला में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, ऐसे में यह यूनिट स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक होगी।