प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के प्रस्ताव का अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ ने विरोध किया है। महासंघ का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब टीईटी की कोई अनिवार्यता नहीं थी, उन पर अब यह शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है। वीरवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में महासंघ के राज्य अध्यक्ष विनोद सूद ने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय हुई थीं, जब टीईटी पास करना भर्ती की अनिवार्य शर्त नहीं था। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर अब नई शर्त लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला लागू किया गया तो देशभर के लाखों शिक्षकों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। महासंघ ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और पहले से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग की है।