प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन की बैठक की शुरुआत 2:00 बजे विपक्ष के हंगामे के साथ शुरू हुई। विपक्ष प्रश्नकाल शुरू होने से पहले व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए प्रश्नकाल की कार्यवाही में गतिरोध पैदा करने का प्रयास करता रहा। विपक्ष के सदस्य विपिन सिंह परमार बार-बार अपनी बात रखने का प्रयास करने लगे, लेकिन उन्हें स्पीकर ने अनुमति नहीं दी। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए सीधे प्रश्नकाल शुरू कर दिया। इसके बाद सत्ता पक्ष के विधायक विपक्ष के हंगामे के बीच मंत्रियों से प्रश्न करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों के प्रश्नकाल में भाग नहीं लेने पर उन्हें गैर हाजिर मानते हुए सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाया। करीब 2:15 बजे विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। इसके बाद प्रश्नकाल विपक्ष की गैर हाजिरी में ही चलता रहा। विपक्ष के वाकआउट के बाद संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह विपक्ष का दिवालियापन है कि इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। अध्यक्ष से संबंधित जो मुद्दा इन्होंने उठाने का प्रयाय किया, वह नियमानुसार सही नहीं है। आज आपदा पर एजेंडा जयराम ठाकुर ने दिया था। कानून-व्यवस्था भी इनका मुद्दा रहा है। विपक्ष के 10 में से आठ मुद्दे भाजपा नेताओं के लगे हैं। पर लगता है कि आज इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। वाकआउट के बाद मीडिया से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा विधायक दल की बैठक में फैसला लेने के बाद विधानसभा सचिव को नियम 274 के तहत विधानसभा अध्यक्ष को पद से हटाने का प्रस्ताव दिया गया था। नियम के अनुसार जब इस तरह का प्रस्ताव दिया जाता है तो विधानसभा अध्यक्ष स्वयं सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करता है, आसन छोड़ देता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई।