रविवार सुबह 8 बजे से शिमला के लक्कड़ बाजार स्थित एशिया के सबसे बड़े प्राकृतिक आइस स्केटिंग रिंक में पांचवें दिन का सत्र शुरू हुआ। ठंडी सुबह के बावजूद रिंक पर स्केटिंग का रोमांच देखने लायक था। करीब 150 लोग, जिनमें स्थानीय परिवार, बच्चे और देशभर से आए पर्यटक शामिल थे, बर्फ पर गिरते-पड़ते हंसी-ठिठोली के बीच स्केटिंग का आनंद ले रहे थे। सुबह का यह सत्र पुराने हिंदी गानों की धुनों से और खास हो गया। "दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी" और "चला जाता हूं किसी की धुन में" जैसे सदाबहार गीतों के बीच स्केटर्स अपनी कलात्मकता और मस्ती करते नजर आए। हर बार गिरने के बाद लोग खिलखिलाकर हंसते और फिर से बर्फ पर कदम जमाने की कोशिश करते। शिमला आइस स्केटिंग क्लब के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी राजत मल्होत्रा ने कहा की यह रिंक शिमला की पहचान और गर्व है। हर बार जब लोग यहां स्केटिंग का आनंद लेते हैं, तो यह रिंक न केवल शिमला की विरासत को जीवित रखता है, बल्कि इसे और भी खास बनाता है। यहां की प्राकृतिक बर्फ पर स्केटिंग का अनुभव अनमोल है। हालांकि, शाम के सत्र अब भी मौसम के चलते शुरू नहीं हो सके हैं। क्लब को उम्मीद है कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, शाम के सत्र भी जल्द ही शुरू हो सकेंगे। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस सत्र में शामिल लोगों का कहना है कि यह अनुभव न केवल रोमांचक है, बल्कि यादगार भी है। स्केटिंग का यह जश्न शिमला के इस ऐतिहासिक रिंक को और खास बना रहा है।