टोंक शहर में रियासतकाल से धुलंडी के मौके पर निकाली जाने वाली सम्राट की सवारी इस साल भी शान-ओ-शौकत के साथ आयोजित की गई। जुलूस में आगे-आगे मशान अघोरी और शिव तांडव करते कलाकार आकर्षण का केंद्र बने। टोंक जिले के लोगों ने धुलंडी के मौके पर जमकर एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश दिया। जिला मुख्यालय में करीब 150 साल पुरानी परंपरा के तहत सम्राट की सवारी गाजे-बाजे और विभिन्न झांकियों के साथ निकाली गई।
सम्राट की सवारी में दिखीं झांकियां
इस साल सवारी में मशन अघोरी-तांडव, बरसाना की लट्ठमार होली, राधा-कृष्ण की फूलों की होली, और बाल-गोपाल, कृष्ण-सखाओं की होली की सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
ऊंटगाड़ियों और घोड़ियों पर सवार होली के मतवाले
सम्राट की सवारी में 11 ऊंटगाड़ियां और 11 घोड़ियों पर सवार होली के मतवाले बैंड-बाजों की धुनों पर नाचते-गाते हुए जुलूस में शामिल हुए। एक ऊंट सवार सम्राट ने सवारी की अगुवाई की। शहरवासियों ने रास्ते में जुलूस पर जमकर रंग और गुलाल बरसाए। जुलूस में काशी की मशहूर मसान होली, शिव तांडव होली, बरसाना की लट्ठमार होली, और राधाकृष्ण व बाल-गोपाल की होली की झांकियां मुख्य आकर्षण रही।
जुलूस का मार्ग
सम्राट की सवारी का जुलूस अजमेर वालों की कोठी से शुरू होकर पुरानी टोंक के छीपो का मोहल्ला, जोशियों का मोहल्ला, माणक चौक, पालुकों का मोहल्ला, महावीर चौक से टिक्कीवालों का मोहल्ला, निजामसेठ की हवेली, संघपुरा होकर मेहंदवास गेट, घण्टाघर, मुख्य बाजार, बड़ा कुआं, छोटे तख्ता, तेलिया की गली, बड़ा कुआं, नगर बाग रोड, श्याम मंदिर, नौशेमिया का पुल होते हुए फिर अजमेर वालों की कोठी में संपन्न हुआ। इस मौके पर पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता, पूर्व जिलाध्यक्ष गणेश माहुर, ओम प्रकाश पांडे, पिंकू टाक, सुरेश जाजू सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।