शहर में धुलंडी के मौके पर गुर्जर समाज की बरसों पुरानी कोड़ामार होली पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। यह परंपरा वृंदावन और बरसाना की तर्ज पर निभाई जाती है। पुरानी टोंक क्षेत्र के हीरा चौक में आयोजित इस अनोखी होली का आनंद सिर्फ कोड़ा मारने वाली महिलाओं ने ही नहीं, बल्कि शहरवासियों ने भी लिया। कोड़ामार होली की शुरुआत दोपहर करीब 1 बजे हीरा चौक में हुई। यहां गुर्जर समाज के लोगों ने परंपरागत तरीके से होली खेली। चौक में एक बड़े कड़ाह में रंग भरा गया। उसके चारों ओर महिलाएं कोड़े लेकर खड़ी रहीं।
रंग लेकर भागे पुरुष, महिलाओं ने बरसाए कोड़े
परंपरा के अनुसार गुर्जर समाज के पुरुष, खासकर युवा, कड़ाह में भरे रंग को बाल्टी और अन्य बर्तनों में भरकर भागते हैं। जैसे ही वे रंग लेकर भागते हैं, महिलाएं उन पर जमकर कोड़े बरसाती हैं। इस दौरान माहौल में जोश और उत्साह साफ नजर आया।
छतों पर बैठकर महिलाओं और बच्चों ने देखा नजारा
कोड़ामार होली के दौरान आसपास के मकानों की छतों पर महिलाएं, युवतियां और बच्चे बैठकर यह अनोखा दृश्य देखते रहे। लोग हूटिंग कर उत्साह बढ़ाते रहे।
दशकों से निभाई जा रही है परंपरा
गुर्जर समाज की ओर से यह परंपरा कई दशकों से निभाई जा रही है। कोड़ा मार होली का रोमांच देखने हीरा चौक ही नहीं, बल्कि शहरभर से लोग पहुंचते हैं। खासकर गुर्जर समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
हजारों की भीड़, पूर्व सांसद भी पहुंचे
इस बार भी कोड़ामार होली देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़े। पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया भी कार्यक्रम में पहुंचे। महिलाओं से लेकर युवतियां और बच्चे तक, सभी ने हीरा चौक के आसपास की छतों पर बैठकर इस अनोखी होली का आनंद लिया।