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Sirohi: 'बढ़ते किराए से हवाई यात्रा गरीब और मध्यम वर्ग की पहुंच से दूर', राज्यसभा में बोले सांसद नीरज डांगी

Sat, 29 Mar 2025 08:10 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही

राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने सदन में वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक-2025 पर चर्चा के दौरान कहा कि एयरपोर्ट निजीकरण से एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी (एएसी) खत्म हो गई है। सांसद के इस कमेटी के चेयरमैन और को-चेयरमैन रहने के अधिकार भी समाप्त हो गए हैं। केंद्र द्वारा निजीकरण को दो से अधिक हवाई अड्डों का ठेका न दिए जाने की सिफारिश, सार्वजनिक निजी भागीदारी के लिए सरकारी पैनल पीपीपी मूल्यांकन समिति द्वारा दरकिनार किए गए प्रमुख सुझावों के परिणाम स्वरूप अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड सभी छह हवाई अड्डों के लिए विजेता बोलीदाता के रूप में उभरी है। पूंजीपतियों के हाथों सौंपने के कारण बेतहासा बढ़ते किराए से हवाई यात्रा गरीब और मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होती जा रही है।

डांगी ने कहा कि एयरपोर्ट के इस पीपीपी मॉडल Privatisation से एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी खत्म हो गई है। स्थानीय सांसद के इस कमेटी के चेयरमैन व को-चेयरमैन रहने के अधिकार भी समाप्त हो गए हैं। सरकार ने एक नया तरीका ढूंढा है कि पहले एयरपोर्ट का संचालन घाटा दिखाया जाता है और फिर उसे अपने पूंजीपति मित्रों को कम दाम में बेच देती है। यह एक नए प्रकार का भ्रष्टाचार पनप रहा है। मानदंडों में बदलाव से एयरपोर्ट क्षेत्र में प्रवेशकर्ता अदाणी समूह को अहमदाबाद, गुवाहाटी, जयपुर, लखनऊ, बंगलूरु और तिरुवंतपुरम में हवाई अड्डों को विकसित करने के लिए सभी छह बोलियां जीतने में सक्षम रही हैं। इसमें वित्त मंत्रालय, नीति आयोग के दिशा निर्देशों की अनदेखी कर अदाणी समूह को लाभ पहुंचाया गया है। इस प्रकार के बिल के माध्यम से केंद्र सरकार एयरपोर्ट को घाटे में दिखाकर पूंजीपतियों के हाथों कम दाम में बेच रही है, जिसकी सीधी-सीधी मार आम आदमी को विमानों के बढ़ते किराए के रूप में झेलनी पड़ रही है।

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अदाणी को दिया गया है पूरा लाभ
इस दौरान सांसद डांगी का कहना था कि वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक-2025, 10 फरवरी, 2025 को राज्यसभा में पेश किया गया था। विधेयक का उद्देश्य दो अंतर्राष्ट्रीय समझौतों मोबाइल उपकरणों में अंतर्राष्ट्रीय हितों पर कन्वेंशन (2001) और विमान उपकरणों से संबंधित मामलों पर मोबाइल उपकरणों में अंतर्राष्ट्रीय हितों पर कन्वेंशन के प्रोटोकॉल को कानून बल प्रदान करना है। परन्तु इसके मूल उद्देश्य से हटकर हवाई अड्डों के निजीकरण में वित्त मंत्रालय, नीति आयोग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी, संख्या पर अंकुश लगने और अनुभव मानदंड को दरकिनार किये जाने से अदाणी को पूरा लाभ दिया गया है।

डांगी ने ये दिए सुझाव
सांसद डांगी ने चर्चा के दौरान कहा कि यदि शहरी, व्यवसायिक हब वाले शहर एवं शैक्षणिक हब शहरों में अगर एयरपोर्ट नहीं है तो नए बनाए जाने चाहिए। अगर वहां एयरपोर्ट है, परन्तु संचालित नहीं है तो एयरपोर्ट को संचालित किया जाना चाहिए। क्योंकि वर्तमान में हिन्दुस्तान तेजी से मेडिकल ट्यूरिज्म सेंटर बन रहा है। ऐसे में हमें एयर एम्बुलेंस सर्विस को तैयार किया जाना चाहिए। लेकिन, ऐसे नहीं होता, जबकि किसी एक बड़े उद्योगपति की शादी के लिए गुजरात के एक शहर का एयरपोर्ट रातों-रात नवीनीकृत हो जाता है और कई उड़ानें उन्हें प्रदान की गई, जो अत्यन्त ही गंभीर है।

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डांगी ने कहा कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत गरीब जनता को हवाई जहाज की यात्रा का अवसर देने के बजाए पूंजीपतियों के हाथों सौंपने से हवाई किराए में अत्यधिक वृद्धि से गरीब व मध्यमवर्गीय आदमी का यह सपना भी चकनाचूर हो गया है। अभी हाल ही में 26 और एयरपोर्टस् का निजीकरण किए जाने का एलान किया गया है। अपने सुझावों के तहत कहा कि खास तौर पर विमानन विनियमन और वित्तीय विवादों के संबंध में सुनिश्चित करें कि प्रावधान अधिकार क्षेत्र संबंधी विवादों से बचने के लिए घरेलू कानूनों के अनुरूप हो। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केन्द्र सरकार और डीसीजीए को विवेकाधीन शक्तियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय स्थापित करें।

निजीकरण से गुणवत्ता में आ रही कमी
डांगी ने कहा कि एयरपोर्ट हादसे जिसमें 28 जून 2024 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के नवनिर्मित टर्मिनल-1 के फोरकोर्ट में लगी छत गिर गई थी। गुजरात के हीरासर में बने राजकोट के नए एयरपोर्ट का उद्घाटन 27 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री ने किया और साल भर बाद ही राजकोट हवाई अड्डे की छत गिर गई थी। जबलपुर में डुमना एयरपोर्ट का छज्जा तीन महीने में ही गिर गया था। कैम्पेगोडा हवाई अड्डे के नवनिर्मित टर्मिनल-2 की छत से बारिश का पानी रिसने लगा था, जिससे बैगेज क्लेम प्रभावित हुए थे। गोपीनाथ बोरदोलोई हवाई अड्डे की छत ढही। वीर सावरकर हवाई अड्डे की छत गिरी। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 में एक मचान से गिरने से दो मजदूरों की मौत हुई थी। बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हादसा, चैन्नई में चेक-इन क्षेत्र में जिप्सम की पट्टी गिरी थी।

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इस प्रकार के हादसों को रोकने के बजाए नए विधेयक के माध्यम से हवाई अड्डों के निजीकरण के द्वारा गुणवत्ता में कमी आती जा रही है, जिसका असर हादसों में मरने वाले व घायलों व उनके परिजनों पर पड़ रहा है। डांगी ने कहा कि पिछले सुधारों जैसे कि विमान नियमों के नियम 30 (7) और नियम 32ए ने कन्वेंशन के आंशिक अनुपालन की पेशकश की, लेकिन व्यापक कानून के बिना इस खंडित परिवर्तनों ने असंगत प्रवर्तन पैदा किया और अदालतों को संपत्ति वसूली में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि कार्योत्तर कानून खराब संकट प्रबंधन को दर्शाता है। संकटों को रोकने के बजाय, यह विधेयक बार-बार एयरलाइन विफलताओं के लिए कार्योत्तर प्रतिक्रिया है।

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सरकार क्षेत्रीय तनाव का अनुमान लगाने या पूर्वानुमानित कानून समाधान के लिए तंत्र बनाने में विफल रही, वैश्विक आलोना के बाद ही प्रतिक्रिया दी गई है। जैसे-जैसे अधिक हवाई अड्डों का निजीकरण हो रहा है और भारतीय एयरलाइनें विदेशी पट्टों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। समय पर सुरक्षा कानून बनाने में सरकार की विफलता ने विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को न्यूनतम नियामक सुरक्षा उपायों के साथ वैश्विक दबावों के प्रति संवेदनशील बनाया है। लेकिन दिवालीयापन और पट्टे विवादों के कारण 160 से अधिक विमान बेकार पड़े हैं। यात्रियों को पीक सीजन में बढ़े हुए किराये का सामना करना पड़ता है। जबकि एयरलाइनें ग्राउंडेड बेडे को लेकर कानूनी उलझन में फंसी रहती है। यह अपर्याप्त परामर्श विधायी वैधता को कमजोर करता है। भारत वैश्विक विमानन केन्द्रों से पिछड़ने का जोखिम उठाता है। 

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