ब्रह्माकुमारीज़ के मेडिकल विंग के तत्वाधान में चलाए जा रहे देशव्यापी नशामुक्त भारत अभियान के तहत शांतिवन परिसर में गुरुवार को संकल्प रैली निकाली गई। हाथों में तख्तियां लेकर ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने नारे लगाए कि हम संकल्प लेते हैं कि अपने घर के आसपास जो लोग भी नशा कर रहे हैं, उन्हें इससे दूर करने में अपना पूरा योगदान देंगे। हम अपने घर-परिवार के सदस्यों को नशे से दूर रहने की समझाइश देकर उन्हें राजयोग मेडिटेशन का संदेश देंगे और भारत देश से नशे की बुराइयों को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
रैली से पूर्व आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल विंग के सचिव डॉ. बनारसीलाल ने कहा कि एक वर्ष में नशामुक्त भारत अभियान के तहत 10,768 कार्यक्रम देशभर में आयोजित किए गए हैं, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 25 लाख लोगों को नशे के दुष्परिणाम बताते हुए, उन्हें नशे से दूर रहने और नशे से होने वाले सामाजिक, शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक नुकसान के बारे में जागरूक किया गया है। करीब 20 लाख 63 हज़ार लोगों ने मौके पर ही सदा नशामुक्त रहने और व्यसन से दूर रहने की प्रतिज्ञा और संकल्प लिया।
28 राज्यों के 345 जिलों में चलाया जा रहा है अभियान
डॉ. बनारसीलाल ने बताया कि देश के 28 राज्यों के 345 जिलों में सभा, सम्मेलन, नुक्कड़ नाटक, संगोष्ठी, प्रदर्शनी और यात्राओं के माध्यम से लोगों को नशामुक्ति का संदेश दिया जा रहा है। इसके अलावा, देश के 7,765 शहरों और कस्बों को कवर करते हुए 3,003 गांवों में भी आमजन, ग्रामीण और किसानों को राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक ज्ञान देते हुए नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया गया है। देशभर में मेडिकल विंग से जुड़े हजारों ब्रह्माकुमार भाई-बहनें देशभर के 3,486 स्कूल-कॉलेजों के 9,31,601 विद्यार्थियों तक यह संदेश लेकर पहुंचे। वहां विद्यार्थियों को खुद नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी नशे से दूर रखने के लिए प्रेरित किया गया।
अभियान तीन साल तक चलेगा
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मेडिकल विंग के बीच तीन साल के लिए एक एमओयू साइन किया गया है। इसके तहत राष्ट्रव्यापी अभियान चलाकर दस करोड़ लोगों को नशामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के तहत सेमिनार, मोटिवेशनल वर्कशॉप, रैलियां, प्रदर्शनी और नुक्कड़ नाटकों के जरिए जागरूकता फैलाई जा रही है। इसके अलावा, मेडिकल विंग द्वारा पिछले 35 वर्षों से नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, जिससे लाखों लोग नशामुक्त होकर आध्यात्मिक जीवनशैली अपना चुके हैं।
काउंसलिंग भी की जा रही है
नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों की ब्रह्माकुमार भाई-बहनें काउंसलिंग कर रहे हैं। राजयोग मेडिटेशन की विधि सिखाकर लोगों को आत्मबल बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नशा कैसे व्यक्ति को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर बनाकर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को खत्म कर देता है, इन सभी बातों के माध्यम से लोगों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
राजयोग मेडिटेशन से बढ़ेगी इच्छाशक्ति
दुनिया में कोई भी नया काम शुरू करने, बुरी आदत को छोड़ने और जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में हमारी इच्छाशक्ति, आत्मबल और आत्मविश्वास सबसे बड़ा योगदान देते हैं। जिस दिन आपने दिल से ठान लिया कि तंबाकू छोड़ना है, उस दिन से कोई ताकत आपको रोक नहीं सकती। इसके लिए केवल मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है। इसमें राजयोग मेडिटेशन संजीवनी बूटी का काम कर सकता है। राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से हमारे विचारों में सकारात्मकता आती है, मन शक्तिशाली बनता है और आत्मविश्वास पैदा होता है। जैसे-जैसे राजयोग ध्यान का अभ्यास बढ़ता है, हमारा आत्मबल भी बढ़ता जाता है। इससे किसी भी कार्य को करने की दृढ़ इच्छाशक्ति स्वतः ही हमारे अंदर आ जाती है। आज हजारों ऐसे उदाहरण हैं जो लोग नशे की गिरफ्त में थे, दिन-रात शराब की लत में डूबे हुए थे, और अब राजयोगी जीवनशैली के साथ आनंदमय जीवन जी रहे हैं। वास्तव में, राजयोग मेडिटेशन हमारे विचारों की सर्जरी कर नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में बदल देता है।