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Kota News: प्रिंसिपल के खिलाफ सड़कों पर उतरीं छात्राएं, कार्रवाई न होने तक दिया सहायक निदेशक के चैंबर में धरना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Updated Tue, 15 Apr 2025 08:59 PM IST

राजस्थान के कोटा जिले में रामपुरा गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य द्वारा छात्राओं को भद्दे मैसेज करने और फोटो मांगने के मामले ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। मंगलवार को छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा कर दिया। छात्राएं कोटा के असिस्टेंट डायरेक्टर के चैंबर में घुस गईं और धरना दे दिया। इस दौरान छात्र नेता भी छात्राओं का समर्थन करने के लिए वहां पहुंच गए और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होगी, धरना खत्म नहीं होगा।

 
छात्रा संघ अध्यक्ष अंजलि मीणा ने बताया कि ये पूरा मामला जब से सामने आया है, उन छात्राओं को लगातार डराया जा रहा है। सामने ये भी आया है कि जब प्राचार्य से इस संबंध में बातचीत करने की कोशिश की गई तो उन्होंने सुसाइड की धमकी दी। इससे साफ पता लगता है कि वे सभी को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में जबतक प्राचार्य के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती है और उनको पद से नहीं हटाया जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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अंजलि मीणा का कहना है कि प्राचार्य के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच नहीं की जाएगी। ऐसे में पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है, ताकि सभी छात्राओं को न्याय मिल सके।
 
वहीं, इस पूरे मामले में कॉलेज एजुकेशन कोटा के असिस्टेंट डायरेक्टर विजय पंचोली ने बताया कि सात अप्रैल को प्राचार्य के खिलाफ जो शिकायत मिली थी, उसको उच्च अधिकारियों को भिजवा दिया है। प्रदर्शन कर रही छात्राओं की फोन पर डायरेक्टर कॉलेज एजुकेशन राजस्थान से बात करवा दी गई है, जिसपर उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दे दिया गया है। ये गंभीर विषय है, जिस पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों की छात्राओं से बात हो गई है।
 
कॉलेज प्राचार्य पर ने छात्राओं ने आरोप लगाए हैं कि दिसंबर माह में कोटा के सरकारी कॉलेज की छात्राएं कॉलेज ट्रिप पर गईं थी। इस दौरान प्राचार्य ने छात्राओं से दुर्व्यवहार किया था। प्राचार्य पर आरोप है कि कुछ छात्राएं प्राचार्य की कार में ही गईं थी और उन्हीं की कार में वापस आईं। इसके बाद से ही कॉलेज का माहौल खराब हो गया। प्राचार्य छात्राओं का ग्रुप बनाकर उन्हें फोटो और चैट भेजने को कहते थे। आरोप ये भी है कि जो छात्राएं प्राचार्य की बात मान लेतीं तो उनको कोई तकलीफ नहीं होती थी और जो छात्राएं बात नहीं मानती थी, उनको परेशान किया जाता था। साथ ही उनको परीक्षा में नंबर कम देने की भी धमकी दी जाती थी।

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