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जयपुर आग हादसे पर कोटा प्रशासन सतर्क: MBS अस्पताल में कई खामियां, छात्रावासों में यह डिवाइस न होने पर कार्रवाई

Mon, 06 Oct 2025 09:29 PM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा/जयपुर

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में आग लगने से आठ लोगों की मौत के बाद अब राजस्थान सरकार और प्रशासन सतर्क हो गए हैं। पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी उपकरणों और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में कोटा के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में जब प्रशासनिक टीम ने रियलिटी चेक किया, तो कई गंभीर खामियां सामने आईं। अस्पताल के कई वार्डों में खुले बिजली के तार और ढीले स्विचबोर्ड पाए गए, जबकि कुछ स्थानों पर पुराने विद्युत कनेक्शन भी खुले पड़े थे। हालांकि अस्पताल के आईसीयू में फायर सेफ्टी के नए उपकरण लगे हुए मिले और सुरक्षा मानकों का पालन होता दिखा।
 
अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि जयपुर हादसा बेहद दुखद है। इससे सबक लेते हुए कोटा अस्पताल में सुरक्षा को लेकर और सतर्कता बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि एमबीएस अस्पताल में समय-समय पर सभी उपकरणों की मॉनिटरिंग की जाती है और किसी भी खराब उपकरण को तुरंत बदल दिया जाता है। डॉ. मीणा ने यह भी बताया कि जिन स्थानों पर पुराने तार हैं, उन्हें बदलने का कार्य जारी है और सभी खुले तारों को दीवारों के सहारे सुरक्षित किया जा रहा है ताकि कोई खतरा न रहे।

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गौरतलब है कि एमबीएस अस्पताल में कुछ वर्ष पहले भी आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से आग लग चुकी है। उस समय वहां भर्ती मरीजों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। अस्पताल के तत्कालीन इंचार्ज जितेन्द्र मीणा ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाया था। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में स्टाफ का पहला कर्तव्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
 
इस बीच, जयपुर अग्निकांड के बाद कोटा प्रशासन ने न केवल अस्पतालों बल्कि छात्रावासों की भी सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। फायर ब्रिगेड और नगर निगम की टीमें शहर के प्रमुख हॉस्टलों, कोचिंग सेंटर्स और हॉस्पिटलों में उपकरणों की जांच में जुटी हैं। इसी दौरान एक छात्रावास में एंटी हैंगिंग डिवाइस न मिलने पर प्रशासन ने उस कमरे को सील कर दिया है। इससे पहले भी कोटा में छात्र आत्महत्याओं के बाद इस उपकरण को अनिवार्य किया गया था।

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