राज्यसभा सांसद CWC सदस्य और कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी जोधपुर प्रवास पर रहे। इस प्रवास के दौरान उन्होंने जोधपुर के सर्किट हाउस में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंनेकहा कि राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों पर देश की सबसे बड़ी संस्था 'चुनाव आयोग' शपथ पत्र पेश करने की बात कर रही है, जो हास्यास्पद नजर आती है। उन्होंने कहा कि संसद के संसदीय क्षेत्र की जहां एक या दो असेंबली में अगर ऐसा करें तो संसदीय सीट का पूरा परिणाम बदल जाता है।
प्रतिपक्ष नेता कंप्लेंट द्वारा चुनाव के बारे में चुनाव आयोग को लिखते हैं। इसमें जांच करके एक हफ्ते या दस दिन बाद आपको जवाब देना चाहिए, लेकिन ऐसा रिएक्शन आना तो दूर की बात उल्टा राहुल गांधी पर ही आक्रमण शुरू कर दिया गया, जोकि गलत है । भारत की संवैधानिक संस्था को राहुल गांधी के द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सही से जवाब देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अगर कोई गलतियां हैं तो उसकी जांच करके उसको निरस्त किया जा सकता है।
बिहार में चल रहे मतदाता सूचियों के मुद्दे पर बोलते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हर बार सरकार यही कहती है कि यह तो नेहरू जी लेकर आए। यह उनकी हॉबी है। हर चीज में नेहरू जी को डाल देते हैं। इस काम को करने की जल्दी क्या हुई। साथ ही उन्होंने कहा कि हम एसआईआर के विरुद्ध नहीं हैं। हम यह कहते हैं कि जून के लास्ट में SIR करने की जल्दी क्या हुई। इसी एस आए आर को 2003 में किया था। तब 2 साल थे संसद के चुनाव में और असेंबली के चुनाव में एक साल था। आप इसे दिसंबर के बाद भी कर सकते थे। इस दो ढाई महीने की सीमा में करके आप करोड़ों लोगों को हटाने की बात कर रहे हैं आज, बिना किसी दस्तावेज़ के। खुद चुनाव आयोग ने माना है कि 65 लाख लोग हट गए हैं। हमेशा वृद्धि होती है, लेकिन इस बार मतदाता सूचियों में घटत हुई है।