पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जैसलमेर जिले में मौसम ने अचानक करवट ले ली। गुरुवार सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रही और दिन चढ़ने के साथ-साथ तेज हवाओं ने पूरे जिले में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। दिनभर बदले मौसम के मिजाज ने आमजन से लेकर किसानों तक को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय औसतन 15 से 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं, जिससे तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई। वहीं ग्रामीण इलाकों में हालात और भी चुनौतीपूर्ण रहे, जहां तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी ने दृश्यता को काफी हद तक प्रभावित कर दिया। अचानक हवा की रफ्तार बढ़ने से सड़कों पर चल रहे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर धूल के गुबार छा जाने से यातायात की रफ्तार धीमी हो गई।
शाम को बदला मिजाज, रात में हुई हल्की बारिश
दिनभर के तेज हवा और आंधी के दौर के बाद गुरुवार देर शाम मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिला। रात करीब 10 बजे शहर में हल्की बौछारों के साथ बारिश का दौर शुरू हुआ, जो लगभग 15 मिनट तक जारी रहा।
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बारिश के दौरान कुछ इलाकों में सड़कों पर हल्का पानी जमा हुआ, लेकिन किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली। मौसम विभाग के अनुसार यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर असर का परिणाम रही, जिससे जिले के कुछ हिस्सों में ही हल्की वर्षा दर्ज की गई।
किसानों की उम्मीदों को लगा झटका
मौसम में आए इस बदलाव से जिले के किसानों की उम्मीदें एक बार फिर चर्चा में आ गईं। किसानों को आशा थी कि यदि मावठ की बारिश होती है तो रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं और सरसों, को इसका बड़ा फायदा मिलेगा। हल्की बारिश से फसलों में नमी बढ़ती और पैदावार बेहतर होने की संभावना बनती।
लेकिन प्रकृति का चक्र उल्टा साबित हुआ। बारिश अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई, जबकि तेज हवाओं और आंधी ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया। कई क्षेत्रों में गेहूं और सरसों की फसल झुक गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में संतुलित बारिश नहीं हुई तो फसल पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। तेज हवाओं और धूल भरी आंधी के कारण शहर के बाजारों में भी दिनभर चहल-पहल कम रही। खुले स्थानों पर कारोबार करने वाले दुकानदारों को सामान समेटना पड़ा।