साल में एक दिन के लिए यह साल भर इंतजार करते हैं। तैयारी करते हैं और रावण के पुतले बनाते हैं। 1 साल का 3.30 लाख रुपए के आसपास का कारोबार करते हैं। जिससे साल भर जीने के संसाधन जुट जाते हैं। कोई नागौर का रहने वाला है कोई जालौर का रहने वाला है तो कोई अजमेर का रहने वाला है।
लगभग 5000 परिवार रावण के पुतले बनाने का काम करते हैं पिछले 35 साल से यह परिवार जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर रावण के पुतले बनाने का काम कर रहे हैं पर इस बार मानसून की दस्तक ने उनके इस कारोबार पर पानी फेर दिया है।
मिरासी परिवारों की अमर उजाला के साथ हुई बातचीत में महिलाओं ने बताया सैकड़ों वर्ष पुरानी यह परंपरा है जिसमें यह मान्यता है कि अगर हर साल रावण पुतला दहन नहीं हुआ तो हर घर में रावण होगा इसी परंपरा के तहत यह हर वर्ष रावण का पुतला बनाते हैं और लोग इनसे वह पुतले खरीद कर ले जाते हैं और उनका दहन कर समाज से रावण को मिटाने का संकल्प लेते हैं परंतु इस बार मानसून की बरसात ने उनकी मेहनत को बर्बाद कर दिया है
अब भीगे हुए और बिगड़े हुए रावण के पुतलों को खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है महिलाओं ने यह भी बताया कि 50-50 फुट के रावण के पुतला का पूर्व में ही ऑर्डर लोगों के द्वारा दिया गया था क्योंकि अब वह रावण का पुतला बारिश में भीग गया है हमने उसे फिर से ठीक भी किया पर खरीदार उसको लेने के लिए वापस नहीं आ रहा है,