राजस्थान शिक्षा परिषद में व्यावसायिक प्रशिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन और वेतन को लेकर लगाए गए आरोपों और सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद के बीच Indian Institute of Skill Development (IISD) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आईआईएसडी के नेशनल हेड पंकज कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक और अधूरी जानकारी प्रसारित कर कंपनी की छवि खराब करने तथा उसे बदनाम और ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जा रहा है।
51 प्रशिक्षकों के दस्तावेजों में मिली थीं खामियां
पंकज कुमार के अनुसार, राजस्थान शिक्षा परिषद ने 12 जून 2023 को व्यावसायिक प्रशिक्षकों के योग्यता संबंधी दस्तावेजों की जांच के लिए जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की जांच में 51 प्रशिक्षकों के दस्तावेजों में खामियां पाई गईं। इसके बाद वर्ष 2023-24 में संबंधित लोगों का वेतन रोकने के आदेश जारी किए गए। उन्होंने कहा कि सक्षम स्तर से आगामी आदेश जारी होने तक इन मामलों में भुगतान संभव नहीं है।
‘सभी प्रशिक्षकों की सैलरी रोकने का दावा गलत’
आईआईएसडी ने स्पष्ट किया कि जिन प्रशिक्षकों के दस्तावेज नियमानुसार सही पाए गए हैं, उनका वेतन सुचारू रूप से दिया जा रहा है। किसी जिले में यदि कुछ माह का भुगतान लंबित है तो उसका भुगतान भी किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों का वेतन रोक दिए जाने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है।
चयन प्रक्रिया में कई चरण, 20-22 हजार रुपये वेतन का दावा
पंकज कुमार ने बताया कि प्रशिक्षकों के चयन में समाचार पत्रों में विज्ञापन, दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार, पढ़ाने की क्षमता की जांच, स्कूल स्तर पर नियोजन तथा प्रधानाचार्य और जिला कार्यालय स्तर पर कागजात की जांच जैसे चरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों को 20 हजार और 22 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से वेतन दिया जाता है। 25 हजार रुपये वेतन का दावा गलत है। वेतन से नियमानुसार TDS की कटौती कर आयकर विभाग में जमा कराई जाती है।
‘7 से 10 हजार रुपये वेतन कटौती का दावा भी गलत’
कंपनी ने 7 से 10 हजार रुपये तक वेतन कटौती के दावे को भी गलत बताया। वहीं 14 से 17 महीने की सैलरी बकाया होने के दावों पर IISD ने कहा कि ऐसे दावों में वे लोग भी शामिल हैं, जिनके नाम अयोग्य सूची में हैं और जिनके दस्तावेज जांच में सही नहीं पाए गए थे।
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तीन महीने पुराना वीडियो वायरल करने का आरोप
कंपनी के अनुसार, वायरल किया जा रहा IISD कार्यालय का वीडियो करीब तीन महीने पुराना है और उसके बाद कई महीनों का भुगतान किया जा चुका है। पंकज कुमार ने कहा कि पुराने वीडियो को वर्तमान स्थिति बताकर प्रसारित करना तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना है।
‘प्रमाण हैं तो सक्षम प्राधिकारी के सामने रखें’
उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति पर वर्ष 2023 के चुनाव के समय स्थायी नौकरी का आश्वासन देने और पैसे लेने के दावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास इसके प्रमाण हैं तो उन्हें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।