दौसा रेलवे स्टेशन पर स्थित अधिकारी रेस्ट हाउस से दिनदहाड़े चोरी का मामला सामने आया है। यहां चोरों ने कई बार चोरी की वारदात को अंजाम देकर सामान ऑटो में लोड कर ले गए। 16 नवंबर को आरपीएफ को शिकायत मिलने पर सीसीटीवी फुटेज के जरिए चोरों की पहचान की गई। अब तक 8 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें चोरी में शामिल और चोरी का सामान खरीदने वाले शामिल हैं। 1.12 लाख रुपये का सामान बरामद किया गया है। रेस्ट हाउस 2018 से सूना पड़ा था, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी में लापरवाही उजागर हुई। मामले में रेलवे के कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
चोरी के इस मामले की शिकायत 16 नवंबर को वरिष्ठ अनुभाग अभियंता कार्य बांदीकुई द्वितीय और वरिष्ठ अनुभाग अभियंता विद्युत बांदीकुई ने आरपीएफ चौकी दौसा को दी। इसके बाद आरपीएफ एक्शन में आई और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले तो ऑटो चालक की पहचान हुई। इसके बाद आरोपियों की धरपकड़ शुरू की गई।
चोरी के इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें चोरी की वारदात में लिप्त और सामान खरीदने वाले भी शामिल हैं। अभी तक इस खेल के मास्टरमाइंड मोस्ट वांटेड दो आरोपी अभी भी फरार हैं। आरपीएफ ने गिरफ्तार किये लोगों से एक लाख 12 हजार 484 रुपये का सामान बरामद कर लिया है। गिरफ्तार आठ लोगों में से ई-रिक्शा चालक को जमानत मिल गई है, जबकि सात अन्य न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
बताया जा रहा है रेस्ट हाउस स्टाफ क्वार्ट्स के बीचोंबीच बना है, जो 2018 दिसंबर में लोकार्पण के बाद से ही सूना पड़ा है। लगभग पूरे समय यह किसी काम में नहीं आया। सबसे बड़ी बात यह है कि रेलवे ने लाखों करोड़ों रुपये लगाने के बाद इस रेस्ट हाउस का निर्माण किया था, लेकिन इसके रखरखाव के लिए एक चौकीदार तक यहां मौजूद नहीं है।
चोरों ने इस रेलवे के रेस्ट हाउस में चोरी करने के लिए एक बार नहीं बल्कि पिछले कई महीनों में कई बार बार अंजाम दिया है। इसकी भनक न तो यहां मौजूद रेलवे के अधिकारियों को लग पाई ना रेलवे क्वार्टर में रह रहे लोगों को और न ही आरपीएफ के जवानों को। बताया तो यह भी जा रहा है कि इस चोरी में रेलवे का कोई सुविधा कार्मिक लिप्त है, जिसकी सह और उसकी मौजूदगी में यह सारा चोरी का खेल हुआ। इस चोरी के मामले में यदि जांच की जाए तो हो सकता है कि रेलवे के और भी लोग इस चोरी में लिप्त पाए जाएं।