बाड़मेर जिले में होली का पर्व इस बार रंगों के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के कारण खास बना रहा। पूरे शहर में उत्साह का माहौल नजर आया। यहां होली के मौके पर नवविवाहित जोड़ों और छोटे बच्चों के लिए विशेष रस्में निभाई जाती हैं, जो इस पर्व को और भी खास बना देती हैं।
धुलंडी पर दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे नवविवाहित और बच्चे
धुलंडी के दिन नवविवाहित जोड़े और छोटे बच्चे दूल्हा-दुल्हन की तरह सज-धजकर ढोल-नगाड़ों के साथ होली स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने पारंपरिक रस्में निभाईं। पूरा माहौल गीत-संगीत और खुशियों से भरा रहा।
छोटे बच्चों की ‘ढूंढ’ की रस्म का विशेष महत्व
स्थानीय पंडितों के अनुसार, पिछले साल या होली से पहले जन्मे छोटे बच्चों के लिए होली पर ‘ढूंढ’ की रस्म का खास महत्व होता है। धुलंडी के दिन परिवार के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ गीत गाते हुए बच्चों को होली दहन स्थल तक लेकर जाते हैं। यहां बच्चों के चाचा उन्हें गोद में उठाकर होली की परिक्रमा करवाते हैं। मान्यता है कि इस रस्म से बच्चों को बुरी नजर, बीमारी और हर तरह की परेशानी से बचाव मिलता है।
नवविवाहित जोड़ों ने मांगी सुख-शांति की कामना
एक नवविवाहित युवक ने बताया कि उनकी हाल ही में शादी हुई है और शादी के बाद यह उनकी पहली होली है। परंपरा के अनुसार वे होली की पूजा और परिक्रमा करने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यहां पूजा कर उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और खुशहाली की कामना की है।
शादी के बाद पहला बड़ा उत्सव माना जाता है होली
कैलाश जोशी ने बताया कि शादी के बाद नवविवाहित जोड़ों के लिए होली पहला बड़ा त्योहार होता है। इस दिन वे फिर से दूल्हा-दुल्हन की तरह तैयार होकर होली स्थल पर पूजा करने जाते हैं। उन्होंने कहा कि होली की अग्नि जीवन में नई ऊर्जा देती है। नव दंपति अग्नि से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन में कोई दुख न आए और हमेशा शांति और प्रेम बना रहे।