दिल्ली के मुकंदपुर जनता बिहार के मछली मार्केट में रहने वाला सात साल का बालक मोबाइल पर मां का फोटो देखते ही फफक-फफक कर रो पड़ा। दो साल बाद मां को देखा, मां भी बिलखने लगी और रोते हुए बाल अधिकारिता विभाग अलवर के अफसरों से बोली साहब मेरे बेटे को अब किसी को मत दे देना। हम आ रहे हैं, यह सुनकर अफसर भी भावुक हो गए।
असल में 19 मार्च 2023 को लकड़ी का काम करने वाले मूल रूप से बिहार के खगड़िया के चुमती गांव निवासी अरविंद शर्मा और कामिनी शर्मा के सात साल के बेटे आदर्श को दिल्ली में मुकंदपुर के मछली मार्केट के पास से एक साधु नशीली दवा सूंघाकर उठा लाया था। उसके बाद से मां-बाप को बालक आदर्श का पता ही नहीं चला था कि कहां गया। मां-बाप ने दिल्ली की हर सब्जी मंडी सहित आसपास की जगह छान मारी। मां रोजाना बेटे को याद करती और रोने लग जाती और इधर सात साल का बेटा रोज मां को याद कर बिलखता रहा। अज्ञात साधु उसे अपने साथ दिल्ली से अलवर ले आया। यहां आसपास के जंगलों में बने मंदिरों में ले गया। नारायणी धाम के पास भी ले गया और वहां रखा। खुद के खाने के लिए बालक से ढाबे पर बर्तन साफ कराए। बहुत बार बालक भूखा रहा। लेकिन एक दिन अलवर के खैरथल रेलवे स्टेशन पर बालक अकेला घूमता मिला।
पुलिस को खबर मिलने के बाद बाल अधिकारिता विभाग अलवर की टीम को सूचित किया। 10 अप्रैल से बालक को अलवर के भूरासिद्ध स्थित छात्रावास में रखा गया। तभी से विभाग की टीम बालक से पता कर उसके परिजनों तक पहुंचने की कोशिश करने में लगी रही। लेकिन सफल नहीं हुए। आखिर में आधार कार्ड से कुछ दूर के रिश्तेदार का पता लगा। तब परिजनों तक पहुंचे। उसके बाद मां-बेटे की वीडियो कॉलिंग पर बात कराई गई। अब 31 जनवरी 2025 को बालक को लेने माता-पिता अलवर आए। यहां दोनों मां-बेटे मिले तो रोने लगे, मां ने उसे गले लगाया।
बालक आदर्श ने बताया कि वे पांच भाई बहन हैं। उसे इतना याद है कि अपने दोस्तों के साथ घर से कुछ दूर खेल रहे थे। तब एक साधु आया था। उसने उसे पकड़ लिया। उसके बाद कुछ याद नहीं।बाद में साधु उसे नारायणी धाम की तरफ ले आया। कुछ अन्य जगहों पर भी लेकर गया। उसे कहता था कि तेरे नाम जमीन करा दूंगा। मेरे साथ ही रहना है। मैं उसके लिए खाना लाने होटल जाता था। कुछ देर ढाबे पर बर्तन साफ करता था। फिर खाना लेकर आता था। बहुत बार भूखा भी रहा हूं। मां की याद हमेशा आती रही। लेकिन मुझे घर का मोबाइल नंबर नहीं पता था। बस इतना पता था कि दिल्ली में मछली मार्केट के पास घर है। इस आधार पर टीम ने कई बार वहां जाकर पड़ताल की, लेकिन पता नहीं चला।
पिता अरविंद ने बताया कि हर दिन काम पर जाने से पहले सब्जी मंडी जाकर बेटे को तलाशते थे। ऐसा लगता था कि कहीं आसपास गुम हो गया है। रास्ता भटक गया। हो सकता है सब्जी मंडी में मिल जाए। लेकिन नहीं मिला, बहुत बार तो बेटे की याद में काम छोड़कर घर आ जाता था। फिर कहीं ढूंढ़ने निकल जाता था। इसी तरह मां भी बेटे को ढूंढ़ती रहती थी। बाल अधिकारिता विभाग, अलवर की टीम के प्रमुख रविकांत का कहना है कि बहुत प्रयास करने के बाद बालक के आधार कार्ड की डिटेल से कुछ जानकारी मिली। उसके बाद कई जगहों पर ढूंढ़ते हुए उसके परिवार तक पहुंचे हैं। यह बड़ा सुखद पल रहा, जब मां-बेटे की फोन पर बात कराई और दोनों रो पड़े।