अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के निर्भमपुरा गांव में सरकारी शिक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक शिक्षक का शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है, जहां फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है। परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर अकबरपुर थाने में सात शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
30 जून को रिटायर होने वाले थे शिक्षक
बड्डन लाल भलाई पिछले 25 वर्षों से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास, पंचायत समिति उमरेड में अध्यापक पद पर कार्यरत थे। उनकी कुल सरकारी सेवा लगभग 38 वर्ष की होने वाली थी और आगामी 30 जून 2026 को उनका सेवानिवृत्त होना तय था। परिवार में पत्नी, तीन बेटे, तीनों पुत्रवधुएं और पोतियां हैं, जो पूरी तरह उन पर आश्रित थे। मौके से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें शिक्षक ने स्कूल के कुछ अध्यापकों और प्रिंसिपल पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाया है।
शिक्षक ने सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप
सुसाइड नोट में शिक्षक ने बताया कि वे पिछले चार-पांच वर्षों से मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति से गुजर रहे थे। बेटे की शादी से ठीक पहले उन्हें गंभीर माइंड स्ट्रोक आया था, जिससे शरीर का आधा हिस्सा पैरालाइज हो गया, आंखों की रोशनी कम हो गई और मानसिक संतुलन भी प्रभावित हुआ। शिक्षक ने लिखा कि इतनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद उनसे लगातार भारी प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य कराए जाते रहे। उनके पास निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, वर्क बुक, लाइब्रेरी, कक्षा 1 से 12 तक का चार्ज और PEEO नोडल के तहत आठ विद्यालयों का अतिरिक्त कार्यभार था।
मृतक के साथ गाली-गलौज भी करते थे सहयोगी शिक्षक
बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई भी शिक्षक उनका चार्ज लेने को तैयार नहीं हुआ। सुसाइड नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ शिक्षक शराब के नशे में गाली-गलौज करते थे और धमकियां देते थे कि हमारी पहुंच ऊपर तक है, तेरी नौकरी खा जाएंगे, रिटायरमेंट नहीं लेने देंगे। शिक्षक ने लिखा कि उन्होंने इस संबंध में प्रिंसिपल को भी अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और 'उन्हें जैसे भी हो काम करो' कहकर टाल दिया गया।
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समझाइश के बाद पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए परिजन
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया। सूचना मिलने पर ग्रामीण सीओ शिवानी शर्मा जिला अस्पताल पहुंचीं और परिजनों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। समझाइश के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।