अखिल राजस्थान आशा सहयोगिनी संगठन द्वारा नागौर जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित को प्रदेश अध्यक्ष जमना चौधरी के नेतृत्व में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मांग पत्र सौंपा है। इन्होंने अपनी 11 मांग पत्र में बताया है कि वह सरकार की हर योजनाओं को प्रत्येक ढाणी-ढाणी तक पहुंचने का काम कर रही है। लेकिन प्रदेश सरकार इनकी एक भी बात, इनकी एक भी समस्या की सुनवाई नहीं कर रही है। इसलिए खींवसर ब्लॉक की महिलाओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और अपनी 11 सूत्रीय मांगों को रखा है।
आपको बता दें कि बुधवार को अखिल राजस्थान आशा सहयोगिनी संगठन के माध्यम से राजस्थान में कार्यरत सभी आशा सहयोगिनी ने प्रदेश अध्यक्ष जमना चौधरी के नेतृत्व में जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित को सौंपा। इस मांग पत्र में उन्होंने बताया है कि राजस्थान में आशा सहयोगिनी के द्वारा सरकार की हरी योजनाओं को ढाणी-ढाणी तक पहुंचाने का काम पूरी ईमानदारी के साथ किया जा रहा है। लेकिन उनकी जो 11 सूत्रीय मांग है, उन पर सरकार गौर नहीं कर रही है।
राजस्थान में सभी कार्यरत आशा सहयोगिनियों का मानदेय संविदा रूल्स 2022 के तहत लिया जाए और इन सभी का वेतन 18,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। इनका मानदेय है, उसको भी फिक्स किया जाए। आशाओं को मिलने वाला सभी प्रकार का इंसेंटिव दोगना किया जाए। वेपीटीसी का पैसा ही माह के अंदर आशा सहयोगिनियों के खाते में जमा हो। आशा सहयोगिनियों को राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जीवन बीमा पॉलिसी पांच लाख की जाए। आशा सहयोगिनियों को एएनएम भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण की भी मांग रखी है।
आशा सहयोगिनियों के नाम की जगह चिकित्सा स्वास्थ्य कर्मी नाम की मांग रखी है। आशा सहयोगिनियों से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कार्य ही करवाए जाए। यदि कोई दूसरा कार्य करवाया जाता है तो उसका अलग से पैसा सरकार द्वारा दिलवाया जाए। आशाओं को राज्य कर्मचारियों के समान सभी सुविधा मिले और उनको योग्यता के आधार पर पदोन्नति भी मिले। सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की सहायता राशि मिले। पेंशन के रूप में 5,000 प्रतिमाह उनको भी मिले। राज्य सरकार द्वारा आशाओं को एएनएम प्रशिक्षण उप स्वास्थ्य केंद्र पर करवाने की व्यवस्था हो, ताकि आशा सहयोगिनी को सुविधा मिल सके।
आशा सहयोगिनियों की उपस्थिति उनके ही हस्ताक्षर से प्रमाणित हो, इसमें एएनएम का कोई रोल न हो। वह आशाओं के लिए आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठते हुए काम करने के लिए अलग से टेबल कुर्सी में एक अलमारी का व्यवस्था हो। इसको लेकर उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और जिसमें उन्होंने कहा कि हमारी यह मांगें सरकार से पूरी कार्रवाई जाए।