जल ही जीवन है, हर बूंद अनमोल है पर एक बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं मोगा के नहेर बस्ती में 400 परिवार। मोगा के दुननेके नहेर के साथ लगते नहेर बस्ती में पिछले 30 सालों से करीब 400 घर पानी की समस्या झेल रहे हैं। इलाके के लोगों को कभी नगर निगम के टैंकरों के सहारे तो कभी 3 किलोमीटर दूर से गुरुद्वारा या कोई सरकारी नल से रेहड़ी पर पानी भरकर लाना पड़ता है। पानी की भारी किल्लत के बीच लोग मजबूरी में इसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं। इस गर्मी में बिना नहा कर बच्चों स्कूल में जाता हे तो घर महिलाओं और अन्य को भी बिना नहाकर गुजारा करना पड़ता हे। इस बस्ती के लोगों के पास आधार कार्ड , वोटर कार्ड रहकर भी आज भी 30 सालों से पानी की समस्या को लेकर परेशान हे। बही बस्ती के लोगों ने बताया कि पिछले 30/35 सालों से उनकी एक ही समस्या बनी हुई है, चाहे गर्मी हो या सर्दी। लोगों का कहना है कि इस बस्ती में 400 से अधिक परिवार रहते हैं, लेकिन आज तक पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई। अभी भी नगर निगम के टैंकरों के सहारे ही लोगों को पानी मिल रहा है। कई बार टैंकर समय पर नहीं पहुंचते, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि कई बार उन्हें 3 किलोमीटर दूर से रेहड़ी में पानी भरकर लाना पड़ता है। बच्चों को बिना नहाए स्कूल जाना पड़ता है, जिस कारण स्कूल में शिक्षकों की डांट भी सुननी पड़ती है। भीषण गर्मी में पानी के बिना गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। न नहाने के लिए पानी है और न ही कपड़े धोने के लिए। बस्तीवासियों ने कहा कि उनके पास आधार कार्ड, वोटर कार्ड सहित सभी जरूरी दस्तावेज हैं और वे हर चुनाव में वोट भी देते हैं। हर बार सरकारें और नेता पानी की समस्या हल करने का वादा करते हैं, लेकिन पिछले 30 सालों में कोई भी सरकार स्थायी रूप से पानी के नल नहीं लगवा पाई। लोगों ने कहा कि उन्हें और कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ पानी की सुविधा चाहिए। बस्ती के पास से एक नहर भी गुजरती है, लेकिन उसमें भी पानी नहीं छोड़ा जाता। यदि नहर में पानी छोड़ा जाए तो गर्मी में लोगों को काफी राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल वह भी सूखी पड़ी है।