नगर कौंसिल चुनावों से पहले विकास कार्यों का राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ अब कथित घोटाले के आरोपों में बदलती नजर आ रही है। रेलवे ओवरब्रिज के नीचे लिंक रोड के निर्माण को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। आम आदमी पार्टी युवा मोर्चा के पंजाब सचिव गोपी शर्मा ने नगर कौंसिल अधिकारियों और तत्कालीन प्रधान तथा मौजूदा प्रधान कवरपाल सिंह पर सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। गोपी शर्मा ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर दावा किया कि PWD ने 2 फरवरी को ही तहसील चौक से गांव बिजल तक करीब 12 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना का ठेका जारी कर दिया था, जिसमें रेलवे पुल के नीचे की लिंक रोड भी शामिल थी। इसके बावजूद नगर कौंसिल ने उसी सड़क पर टाइलें लगाकर लाखों रुपये खर्च कर दिए। शर्मा ने आरोप लगाया कि यदि एक ही सड़क का भुगतान नगर कौंसिल और PWD दोनों विभाग करेंगे तो सरकारी खजाने को भारी नुकसान होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही सड़क पर दो-दो विभागों द्वारा खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका लाभ किसे मिलने वाला था। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का दावा करती है, लेकिन नगर कौंसिल में लंबे समय से कमीशनखोरी और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। कभी कागजों में सड़कें बन जाती हैं तो कभी एक ही सड़क को बार-बार बनाकर भुगतान लेने की कोशिश की जाती है। गोपी शर्मा ने कहा कि वह इस पूरे मामले की लिखित शिकायत विजिलेंस ब्यूरो, लोकल बॉडी विभाग, संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्री को देंगे। यदि निष्पक्ष जांच की मांग करेगे PWD अधिकारी ने दोहराया अपना रुख मामले पर PWD के जूनियर इंजीनियर करमजीत सिंह ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि विभाग ने नगर कौंसिल को इस सड़क के निर्माण की कोई मंजूरी (NOC) नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि यह सड़क PWD की परियोजना का हिस्सा थी और विभाग द्वारा ही बनाई जानी थी। पहले भी विवादों में रहा था शिलान्यास फरवरी में विधायक सरबजीत कौर माणूके, उनके पति सुखविंदर सिंह और नगर कौंसिल अध्यक्ष कवरपाल सिंह ने लोगों की मौजूदगी में इस सड़क का शिलान्यास किया था। उस समय इसे बड़ी विकास परियोजना बताकर इसका प्रचार किया गया और मिठाइयां भी बांटी गई थीं। अब जांच पर टिकी निगाहें मामला सामने आने के बाद शहर में चर्चा तेज है कि जब सड़क पहले से ही PWD के अधीन थी और उसका ठेका भी जारी हो चुका था, तो नगर कौंसिल ने उसी सड़क पर अलग से काम कराने की जल्दबाजी क्यों दिखाई। अब लोगों की नजर विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि घोटाले के आरोप फिलहाल आरोप हैं और इनकी आधिकारिक जांच होना बाकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब सकता है। वहीं कुछ लोगों ने आशंका जताई कि राजनीतिक दबाव या रिश्वतखोरी के कारण मामला ठंडे बस्ते में भी जा सकता है।