पंजाब राइस मिल एसोसिएशन की ओर से राज्य के विभिन्न जिलों के राइस मिलरों की अहम बैठक की गई। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिलरों ने सरकार की नीतियों और अपनी समस्याओं को लेकर मांगें रखीं। मिलरों का कहना है कि बिजली की बढ़ी दरों और मजदूरी खर्च के मुकाबले मिलिंग चार्ज पर्याप्त नहीं हैं, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। जिला अमृतसर राइस शेलर मिल एसोसिएशन के प्रधान राजिंदर सलवान ने बताया कि अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर में धान सरप्लस रहता है। इन जिलों की मंडियां पंजाब के अन्य क्षेत्रों की तुलना में करीब 15 से 20 दिन पहले शुरू हो जाती हैं। ऐसे में धान पहले ही दूसरे क्षेत्रों में चला जाता है और बाद में स्थानीय मिलरों को जरूरत के मुताबिक धान नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि आरओ प्रक्रिया और जगह की कमी के कारण भी मिलरों को परेशानी होती है। सरकार को बाहर के जिलों से धान मंगवाने का किराया और फिर चावल की बोरियों की आवाजाही का खर्च उठाना पड़ता है। मिलरों ने एक फीसदी ड्राई, बिजली बिलों में राहत और अन्य राज्यों की तर्ज पर मिलिंग चार्ज बढ़ाने की मांग की है।