बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मुख्य गेट पर मंगलवार को पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन और विभिन्न संगठनों ने फार्मेसी भर्ती परीक्षा के पेपर विवाद मामले तथा यूनिवर्सिटी में हुई अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। धरने को संबोधित करते हुए पीएसयू के नेता धीरज फाजिल्का और प्रदेश नेता हरवीर कौर ने आरोप लगाया कि तकनीकी रूप से पेपर लीक साबित होने के बावजूद पंजाब सरकार इसे केवल नकल का मामला बताकर पेश कर रही है। उनका कहना था कि यदि सरकार पेपर लीक स्वीकार करती है तो स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि नकल के मामलों में सामान्यतः आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं होते, जबकि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई हैं, जिससे स्पष्ट है कि मामला केवल नकल का नहीं बल्कि पेपर लीक का है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पेपर लीक में अत्याधुनिक विदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, जिससे बड़े और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की आशंका है। छात्र नेताओं सुखप्रीत कौर और रजिंदर ढिल्लवां ने आरोप लगाया कि बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में उप कुलपति डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल के दौरान भर्ती प्रक्रियाओं, शोध कार्यों और अन्य प्रशासनिक मामलों में कई अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीएसयू नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया। रजिस्ट्रार ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि यूनिवर्सिटी में अनियमितताओं से जुड़े जो भी प्रमाण प्रस्तुत किए जाएंगे, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान यह भी बताया गया कि फार्मेसी भर्ती परीक्षा के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने परिणामों पर रोक लगा रखी है। इसके बाद पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन ने घोषणा की कि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक उनका अनिश्चितकालीन धरना स्थगित रहेगा तथा अदालत के निर्णय का सम्मान किया जाएगा।