श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूप गायब होने के मामले में एसजीपीसी के पूर्व अकाउंटेंट सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस हिरासत में कोहली के खुलासों ने न केवल एसजीपीसी की कार्यप्रणाली बल्कि पंथक संस्थाओं की जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। कोहली को देर रात अदालत में पेश कर पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। साल 2009 में एसजीपीसी में नियुक्त कोहली की जिम्मेदारी गुरुद्वारों के खातों का ऑडिट, इंटरनल कंट्रोल और कम्प्यूटरीकरण की थी। बावजूद इसके 2020 तक इन जिम्मेदारियों में ठोस काम नहीं हुआ। इस लापरवाही को नजरअंदाज किया गया। अकाल तख्त साहिब की रिपोर्ट व आदेशों पर, एसजीपीसी ने सिख गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमेटी में कोहली से करीब 7.20 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए केस दायर कर रखा है। यह राशि, कोहली एंड एसोसिएट्स को दी गई 9 करोड़ रुपये से अधिक की अदायगी का 75 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि, इस केस के जरिये अब तक एक रुपया भी रिकवर नहीं हो सका है। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा नियुक्त जांच आयोग ने रिपोर्ट में कहा कि यदि समय रहते इंटरनल कंट्रोल लागू होता और खातों का कम्प्यूटरीकरण होता तो पावन स्वरूपों की संख्या में बार-बार बढ़ोतरी और कमी नहीं होती। इस लापरवाही ने एसजीपीसी को आर्थिक रूप से और साख को भी नुकसान पहुंचाया।