भाजपा नेता और पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने रविवार को सचखंड श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमृतसर से उनका पुराना पारिवारिक जुड़ाव है। जब भी वह अमृतसर आते हैं, दरबार साहिब में माथा टेकना उनकी परंपरा रही है। संधू ने सिख इतिहास के अहिंसक मोर्चों, विशेषकर गुरु का बाग और चाबियों वाले मोर्चे का जिक्र करते हुए कहा कि 1920 से 1926 के बीच अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ चले ये आंदोलन देश के सफल अहिंसक आंदोलनों के उदाहरण हैं। इनमें सिखों के साथ हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत और इतिहास की जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि दरबार साहिब के बाद वह दुर्ग्याना मंदिर और भगवान वाल्मीकि मंदिर में भी नतमस्तक होंगे। इसके अलावा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में आयोजित ऐतिहासिक नाटक में भी शिरकत करेंगे। संधू ने शिक्षा को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा और तकनीक के माध्यम से ही युवाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 50 विद्यार्थियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की छह सप्ताह की ट्रेनिंग लेने पर खुशी जताई। उन्होंने पंजाब और अमृतसर के विकास तथा युवाओं के सशक्तीकरण पर राजनीति से ऊपर उठकर ध्यान देने की जरूरत बताई।