विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर अरदास की और कनाडा भेजे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों के कथित अनादर पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने मामले की धार्मिक और कानूनी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भाई परमजीत सिंह अकाली, ज्ञानी तेजबीर सिंह तथा दमदमी टकसाल से जुड़े अन्य सिख प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पावन स्वरूपों को उचित सम्मान के अनुरूप नहीं भेजा गया। उनका दावा है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कथित लापरवाही के कारण स्वरूपों को एक जर्जर बस के कंटेनर और बंक बेड के नीचे रखकर समुद्री मार्ग से कनाडा भेजा गया तथा उनके साथ कोई सेवादार भी नहीं भेजा गया। वक्ताओं ने कहा कि सिख इतिहास में गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का सर्वोच्च सम्मान किया जाता रहा है और इस परंपरा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों ने इस व्यवस्था को मंजूरी दी, उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश किया जाए तथा उनके विरुद्ध धार्मिक और कानूनी कार्रवाई की जाए। अरदास के अंत में संगत ने प्रार्थना की कि भविष्य में गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का प्रबंध और प्रकाश पूर्ण मर्यादा एवं सम्मान के साथ सुनिश्चित किया जाए।