दुर्गियाना मंदिर कमेटी के महासचिव अरुण खन्ना ने आतंकवाद के दौर और 'सतलुज' फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब में आतंकवाद के समय सिखों से अधिक हिंदुओं की हत्याएं हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में पुलिस बड़ी संख्या में लावारिस शव दुर्गियाना मंदिर लेकर आती थी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाता था। अरुण खन्ना ने कहा कि आतंकवाद के दौरान दुर्गियाना मंदिर में सैकड़ों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया गया। उनका कहना था कि उस समय पुलिस इन शवों को लावारिस बताकर मंदिर लाती थी और यह प्रक्रिया आज भी जारी है। उन्होंने 'सतलुज' फिल्म के संदर्भ में कहा कि किसी एक पक्ष की घटनाओं को ही प्रमुखता से दिखाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, आतंकवाद के दौर में सभी समुदायों के निर्दोष लोगों ने पीड़ा झेली और उस समय मारे गए हिंदुओं की त्रासदी को भी सामने लाया जाना चाहिए। खन्ना ने कहा कि आतंकवाद के दौर की घटनाओं का निष्पक्ष दस्तावेजीकरण होना चाहिए ताकि सभी पीड़ितों को न्याय और सम्मान मिल सके।