बैगा जनजाति की पारंपरिक बैगा चित्रकला पर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम लोढ़ा की बैगा महिला चित्रकारों ने बांधवगढ़ विधायक को ज्ञापन सौंपते हुए जिला पंचायत और आजीविका मिशन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कला को गलत तरीके से प्रमोट किया जा रहा है और एक अन्य समुदाय की महिला शंखी काछी को बैगा चित्रकला का विशेषज्ञ बताया जा रहा है।
बैगा कलाकारों का कहना है कि उन्होंने यह पारंपरिक चित्रकला अपने दिवंगत गुरु श्री आशीष स्वामी जी से सीखी थी। वे अपने आसपास के अनुभवों और परंपराओं को दर्शाकर इस कला को आगे बढ़ा रही हैं।
उनकी वरिष्ठ चित्रकार स्व. जोधड़िया बाई बैगा को पद्मश्री और नारी शक्ति पुरस्कार जैसे राष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुके हैं।
सोशल मीडिया पर गलत प्रचार का आरोप
कलाकारों ने आरोप लगाया कि जनसंपर्क विभाग उमरिया ने उनकी पेंटिंग्स को बिना अनुमति सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और शंखी काछी की कहानी के साथ जोड़ दिया। उन्होंने इसे बैगा चित्रकारों के अधिकारों का हनन बताया।
बैगा चित्रकला को GI टैग की मांग
कलाकारों ने कहा कि जिस तरह गोंडी चित्रकला गोंड जनजाति से और भील पिथोरा कला भील जनजाति से जुड़ी है और उन्हें GI टैग मिला है, वैसे ही बैगा चित्रकला भी केवल बैगा जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर है।
बैगा महिला चित्रकारों ने की जांच की मांग
बैगा महिला चित्रकारों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने बांधवगढ़ विधायक शिवनारायण और मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील की है कि बैगा समुदाय की कला और आजीविका की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। गौरतलब है कि बैगा चित्रकला ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। स्व. जोधड़िया बाई बैगा को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।