मध्य प्रदेश के आठ जिलों में सामने आए 150 करोड़ से अधिक के धान उपार्जन और परिवहन घोटाले की आंच अब उमरिया जिले तक पहुंच गई है। इस मामले की विस्तृत जांच के लिए कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने एक विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता संयुक्त कलेक्टर रीता डेहरिया करेंगी, जबकि सहायक आयुक्त सहकारिता, महाप्रबंधक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, जिला प्रबंधक एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन और जिला प्रबंधक एमपी वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन को समिति का सदस्य बनाया गया है।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
जांच समिति को धान उपार्जन, परिवहन और मिलिंग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की बिंदुवार जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल होंगे।
- उपार्जित धान की मात्रा और मिलर्स को किए गए भुगतान की स्थिति।
- मिलवार धान प्रदाय और उठाव की मात्रा तथा सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) जमा की स्थिति।
- धान परिवहन में उपयोग किए गए वाहनों की ट्रैकिंग, टोल नाकों से डेटा प्राप्त करना।
- जिला परिवहन अधिकारी से वाहनों की श्रेणी, प्रकार और लोडिंग क्षमता की जानकारी लेना।
- किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना।
इसके अलावा, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक जिला प्रबंधक सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन द्वारा मिलर्स को धान के नए डिलीवरी ऑर्डर जारी नहीं किए जाएंगे।
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प्रदेश में 150 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला उजागर
मध्य प्रदेश में धान खरीदी और मिलिंग में अब तक 150 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आ चुका है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा की जा रही जांच में यह तथ्य सामने आया कि यह घोटाला नया नहीं है, बल्कि वर्षों से चला आ रहा है। अब तक 60 हजार क्विंटल धान की हेराफेरी उजागर हो चुकी है।
आठ जिलों में गड़बड़ी, 135 लोगों पर FIR
अब तक इस घोटाले में 135 लोगों को आरोपी बनाया गया है। बालाघाट, सतना, सीधी, मैहर, डिंडौरी, सागर, पन्ना और सिवनी में यह बड़ी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। सिवनी जिले में शकुंतला देवी राइस मिल के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। जांच समिति द्वारा की जा रही इस विस्तृत पड़ताल के बाद अन्य जिलों में भी ऐसे घोटाले सामने आने की आशंका जताई जा रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे दोषियों को जल्द से जल्द पकड़कर घोटाले की सच्चाई उजागर की जा सके।