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Ujjain News: महाअष्टमी पर उज्जैन में नगर पूजा, 27 किमी मार्ग पर मदिरा की धार से हुआ पूजन

Tue, 30 Sep 2025 02:57 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर आज 30 सितंबर को नगर की सुख समृद्धि के लिए मदिरा की धार से पूजा हुई। चौबीस खंभा माता मंदिर में सुबह कलेक्टर रौशन कुमार सिंह एवं एसपी प्रदीप शर्मा ने माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर पूजा की शुरुआत की। इसके बाद अधिकारी और कोटवारों का दल ढोल ढमाकों के साथ 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए रवाना हुए। करीब 27 किलो मीटर लंबे नगर पूजा मार्ग पर मदिरा की धार लगाई जाएगी। साथ ही पूड़ी, भजिए, गेहूं व चने की घुघरी अर्पित की जाएगी। मान्यता है ऐसा करने से नगर में मौजूद अतृप्त आत्माएं तृप्त होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही है। कालांतर मे भी रियासत के समय पूजन का क्रम जारी रहा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शासन की ओर से नगर पूजा कराई जा रही है। इस बार तिथि वृद्धि के कारण 30 सितंबर को महाअष्टमी मनाई गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह माता महामाया और महालया को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत की। इसके बाद शासकीय दल अन्य मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए रवाना हुए।

नगर पूजा में यह है खास 27 किलो मीटर लंबा नगर पूजा मार्ग।  40 से अधिक देवी व भैरव मंदिर में होगी पूजा।  12 घंटे का समय लगेगा नगर पूजा में।  35 से अधिक बोतल मदिरा का उपयोग होगा। 
इसिलिए होती है नगर पूजा
धर्मधानी उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही है। कालांतर में राजा महाराजा इस परंपरा का निर्वहन करते आए हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार की ओर से नगर पूजा कराई जाती है। नगर पूजा का शुभारंभ चौबीस खंभा माता मंदिर से होता है। मान्यता है कि यह प्राचीन उज्जैन का मुख्य द्वार है। इस द्वार के दोनों ओर माता महामाया व महालया विराजित है। सर्वप्रथम इन्हीं की पूजा होती है, इसके बाद शहर के अन्य देवी व भैरव मंदिरों में पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी भैरव आदि अनादिकाल से इस नगर की सुरक्षा कर रहे हैं। उन्हीं के आशीर्वाद से प्रजाजन सुखी व संपन्न रहते हैं। देवताओं की कृपा सदा सर्वदा बनी रहे, इसलिए प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर राजा द्वारा देवी भैरव के पूजन की परंपरा है।

हरसिद्धि शक्तिपीठ पर दोपहर 12 बजे होगी पूजा
शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में महाअष्टमी पर दोपहर 12 बजे शासकीय पूजा होगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह व एसपी प्रदीप शर्मा माता हरसिद्धि की पूजा अर्चना करेंगे। देवी को सौभाग्य सामग्री अर्पित की जाएगी। पुजारी रामचंद्र गिरि ने बताया हरसिद्धि मंदिर में शाक्त पूजा होती है। यहां देवी को मदिरा अथवा तामसिक वस्तु अर्पित नहीं की जाती है। इसलिए महाअष्टमी पर कलेक्टर दोपहर में अलग से आकर पूजा अर्चना करते हैं।

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गढ़कालिका में शाम से भंडारा, रात में महाआरती
शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मंगलवार को सिद्धपीठ गढ़ कालिका माता मंदिर में शाम 7 बजे से रात 11.30 बजे तक महाभंडारा होगा। इसके बाद रात 12 बजे ढोल ढमाकों के साथ महाआरती की जाएगी। शासकीय पुजारी महंत करिश्मानाथ ने बताया भक्तों से महाप्रसादी व महाआरती में शामिल होने का अनुरोध किया है। दशहरे के दिन भी महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।

भक्तों में प्रसाद के रूप में बाटी गई शराब
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा चोबीस खम्बा माता मंदिर पर पहुंचे और देवी महालया और महामाया की पूजा कर देवी को मदिरा चढ़ाई। यह महाष्टमी की महापूजा सुबह ढ़ोल नगाड़ों के साथ शुरू हुई। बाद में प्रशासनिक अमला तहसीलदार के नेतृत्व में नगर पूजा पर निकल पड़ा। महापूजा की यात्रा में कोटवार के हाथ में एक कलश रहता है, जिसके पेंदे में छेद किया हुआ होता है। ताकि मदिरा की धार लगातार बहती रही। देवी शक्तियों को चढ़ाई जाने वाली इस मदिरा को प्रसाद के रूप में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने भी ग्रहण किया। 

हांडी फोड़ भैरव पर खत्म होती है पूजा
40 अलग-अलग मंदिरों में पूजा करने के बाद शासकीय अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम हांडी फोड़ भैरव मंदिर पहुंचती हैं। यहां इस पूजा का समापन होता है और शराब से भरी मटकी फोड़ दी जाती है। इस पूजा के लिए आबकारी विभाग 31 बोतल शराब अपनी ओर से देता है। इस पूजा में सिंदूर, कुंकुम, अबीर, मेहंदी, चूड़ी, नारियल, चना, सिंघाड़ा, पूरी-भजिए, दूध, दही, इत्र आदि 40 तरह की चीजों का उपयोग किया जाता है।

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