फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर मंगलवार को चंद्रग्रहण के सूतक काल के बावजूद उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन और पूजा का क्रम जारी रहा। जहां सामान्यतः ग्रहण के वेध काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, वहीं महाकाल मंदिर में परंपरा अनुसार श्रद्धालुओं को दर्शन का लाभ मिल रहा है।
शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले 14 मिनट के चंद्रग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो गया है। इसके कारण मंदिर की पूजा पद्धति में भी आंशिक परिवर्तन किया गया, जिसके चलते सुबह की उद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण, भगवान का स्नान एवं विशेष पूजन कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।
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क्यों नहीं रुकता पूजा क्रम?
मंदिर के पुजारियों के अनुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर दक्षिणमुखी है और भगवान महाकाल कालों के काल माने जाते हैं। मान्यता है कि महाकाल पर किसी ग्रह या नक्षत्र का प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए ग्रहण या वेध काल के दौरान भी मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था बाधित नहीं होती।
आज भी भस्म आरती से लेकर शयन आरती तक प्रतिदिन की तरह मंदिर खुला हुआ है और सूतक काल में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।