पश्चिम बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुई निंदनीय घटना के विरोध में शाजापुर जिला मुख्यालय पर डॉक्टरों ने शनिवार सुबह से चिकित्सा सेवाएं बंद कर विरोध जताया। वहीं, रात को कैंडल मार्च निकाला गया। हालांकि, लोगों की परेशानी को देखते हुए आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।
आईएमए जिला अध्यक्ष, डॉक्टर राजकुमार पाटीदार ने बताया कि पश्चिम बंगाल में हुई घटना की हम कड़ी निंदा करते हैं। महिला डॉक्टर के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। यह बहुत ही शर्मनाक घटना है। अस्पताल परिसर के अंदर ही महिला के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। पश्चिम बंगाल सरकार को दोषियों को जल्द से जल्द सजा देनी चाहिए।
डॉ. भीमराव अंबेडकर जिला अस्पताल से आजाद चौक तक निजी और शासकीय अस्पताल के डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से कैंडल मार्च निकाला। डॉक्टरों ने मांग की है कि दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए और अस्पताल में सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। सरकार को एक मजबूत सुरक्षा नीति लागू करनी चाहिए।
कैंडल मार्च में जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के साथ अन्य चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर भी शामिल हुए। डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से कैंडल मार्च निकालकर दोषियों को सजा दिलाने और डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग की है। डॉक्टर राजकुमार पाटीदार ने बताया कि 16 मार्च को डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया था। शनिवार सुबह 6 बजे से रविवार सुबह 6 बजे तक, आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य चिकित्सा सेवा बंद की थी। हड़ताल और कैंडल मार्च का उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाना और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करना है।