पिछले कुछ दिनों से शहडोल जिले में मौसम में बदलाव देखने को मिले हैं। गुरुवार को शाम लगभग चार बजे हुई बूंदाबांदी के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, खासकर आम की फसल को इसके कारण गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही खलिहान में रखी गेहूं की कटी फसल भी जोखिम में है, जिससे किसानों में निराशा फैली हुई है।
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हाल के दिनों में शहडोल का तापमान चार डिग्री तक गिर गया है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है, लेकिन किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. मृगेंद्र सिंह ने बताया, वर्तमान में आम के फल छोटे हैं और ओलावृष्टि के कारण फसल को काफी नुकसान हो सकता है। साथ ही, जिन किसानों ने गेहूं काटा है और उसे खलिहान में रखा है, वे बूंदाबांदी और ओलावृष्टि से जम सकते हैं।
ज़िले के कई किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। किसानों अरुण तिवारी ने बताया, हमने कड़ी मेहनत से अपनी फसल उगाई थी, लेकिन इस तरह के मौसम ने हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो हमें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान अरुण तिवारी ने बताया कि हमारी 20 एकड़ में गेहूं की फसल अभी पक कर खड़ी है। उसे काटने की तैयारी हम कर रहे थे ,कि बीच में ओलावृष्टि हो गई, जिससे बाली में लगे दाने ओला वृष्टि से झाड़ कर जमीन में गिर रहा है। हमारा काफी नुकसान हो रहा है।
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शहडोल जिले में हाल में आए मौसम परिवर्तन ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। कृषि वैज्ञानिकों और स्थानीय विशेषज्ञों का कहना है कि उचित तैयारी और सावधानी से इस स्थिति का सामना किया जा सकता है। उम्मीद की जाती है कि मौसम में सुधार होगा और किसानों की मेहनत का फल बरकरार रहेगा।