अपनी जरूरत और कर्ज को चुकाने दो बैगा जाति के युवकों ने आईटीआई का प्रशिक्षण लेने के बाद बिजली तार चोरी करने का एक ऐसा गिरोह बना लिया, जो पिछले दो सालों से पुलिस के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए भी सिरदर्द बना हुआ था। खैरहा पुलिस ने एक ऐसे बिजली तार चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो जंगल में जाकर रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच 11 केवी की लाइन को काटकर ठिकाने लगा देता था।
इस गिरोह ने अब तक 10 हजार मीटर से ज्यादा की लाइन काटी है। इसकी कीमत 50 लाख रुपए से अधिक है। इस गिरोह के मास्टरमाइंड को जब खैरहा पुलिस ने गिरफ्तार किया तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। खैरहा थाना प्रभारी दिलीप सिंह ने बताया कि इस मामले में लल्ला बैगा (32), फुंदेलाल बैगा (25), दीपक कुमार चक्रवैस (34) निवासी रूंगटा कालोनी नई दफाई थाना अमलाई हाल बंगवार कॉलोनी थाना धनपुरी, नीरज बैगा (19), संजू बैगा (28), गुरु प्रसाद बैगा (22) अनिल बैगा (21) सभी निवासी तुम्मीवर थाना चचाई जिला अनूपपुर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था।
शहडोल जिले के खैरहा, सिंहपुर, बुढार, धनपुरी, अमलाई समेत अन्य थानों में पिछले कई महीनों से लगातार 11 केवी बिजली लाइन कटने की शिकायत मिल रही थी। तार कटने से कई गांवों में अंधेरा छा जाता था, इस कारण ग्रामीण भी आक्रोशित थे। पुलिस को भी इस चोरी को लेकर कोई सुराग नहीं मिल रहा था, क्योंकि तार कटने के कई दिनों बाद पुलिस के पास यह शिकायत बिजली विभाग, ग्राम पंचायत या ग्रामीणों द्वारा पुलिस को दी जाती थी। चोर इतने शातिर थे कि वो चालू बिजली का तार सूने क्षेत्र में जंगल के बीच जाकर काटते थे। इस कारण ग्रामीणों को पहले यह लगता कि किसी कारण बिजली गुल है, लेकिन जब बिजली विभाग फाल्ट तलशाने जंगलों में घूमता तब चोरी की वारदात का पता चलता था।
थाना प्रभारी ने बताया कि इस गिरोह के दो मुख्य सरगना हैं। आरोपी फुंदेलाल बैगा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान अनूपपुर से मशीनिस्ट ट्रेड से और लल्ला बैगा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बेनिबारी से वेल्डर ट्रेड से पढ़ाई कर चुके हैं। इस पढ़ाई को करने के बाद दोनों अपने तकनीकि ज्ञान का उपयोग बिजली तार काटने में लगाने लगे। 11 हजार केवी का बिजली तार जिसमें करंट दौड़ रहा है उसे फाल्ट करके कैसे बंद करना है और बिना बिजली के खंभे में चढ़े तार कैसे काट लेना है इसमें ये दोनों माहिर हो गए थे।
क्षेत्र में लगातर बिजली चोरी से परेशान पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल रहा था, तभी खैरहा पुलिस को जानकारी हुई कि अनूपपुर जिले में रेलवे की संपत्ति चोरी में अनूपपुर जिले के तुम्मीवर गांव के कुछ लड़के गिरफ्तार हुए हैं। यह गांव शहडोल जिले का बार्डर गांव था जो खैरहा थाना क्षेत्र से लगा हुआ था। खैरहा थाना प्रभारी दिलीप सिंह ने बताया कि इस गिरोह का पहला सुराग यहीं से मिला। इसके बाद पुलिस लगातार तुम्मीवर गांव में रैकी करने लगी, गिरोह के सदस्यों का पता जुटाने लगी। इसके बाद पुलिस को एक-एक करके सभी सदस्यों की जानकारी मिलती गई। पुलिस उन सभी चोरों की गतिविधियों पर दूर से नजर रखने लगी थी।
ऐसे करते थे बत्ती गुल
यह गिरोह रात 12 बजते ही गांव से बाहर जंगलों में पहुंच जाता था। एक छोर पर लल्ला बैगा तो दूसरे छोर पर फुंदेलाल बैगा रहकर बिजली तार काटने का काम करते थे। इसके लिए आरोपियों ने नायलोन की रस्सा लिया था। जिसमें कपड़ा लपेट कर एक भाग से दूसरे भाग रस्सा को फेंककर सभी फेस के तार को एक साथ खींचकर आपसे में मिला देते थे। इससे शार्ट शर्किट हो जाता और बिजली गुल होने पर कटर और गड़ासा से लाइन को काट लेते थे। इस बीच वे जंगल में बहुत ज्यादा हलचल नहीं करते थे। यह पूरा काम दोनों आरोपी सुबह 4 बजे के पहले कर लिया करते थे।
दूसरे गिरोह का था ये काम
जैसे ही बिजली का तार काटकर ये दोनों आरोपी गिरा देते थे उसके बाद दूसरा गिरोह सक्रिय होता था। लगभग एक से दो किलोमीटर क्षेत्र में गिरे तार को बंडल बनाकर इसे जंगल में सुरक्षित रखा जाता। जैसे ही यह बंडल बनता पहले से ही आसपास खड़ा लोडर वाहन जंगल के अंदर आता और इस तार को वाहन में लोड कर आरोपी इसे बुढ़ार और अमलाई में चिन्हित दो कबाड़ियों के पास पहुंचा देते थे। पुलिस ने बताया आरोपियों ने टाइम लिमिट सेट करके रखा था। सुबह 5 बजे के पहले-पहले किसी भी हालत में तार के बंडल को कबाड़ियों के ठीए में पहुंचाना था।
तार गलाकर बनाते थे बर्तन
खैरहा थाना प्रभारी दिलीप सिंह ने बताया कि यह तार बुढ़ार के कबाड़ी लाला ताम्रकार और गुलाम हुसैन उर्फ राजा कबाड़ी निवासी बस स्टैंड के पास अमलाई के पास पहुंच जाता था। ये कबाड़ी सिल्वर तार को गलाकर बर्तन बनाकर बाजार में बेच देते थे। इस मामले में खैरहा पुलिस ने लाला ताम्रकार और राजा कबाड़ी को भी गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों आरोपी तार को एक निश्चित ताप में गलाकर उसे बर्तनों के सांचे में ढालकर बाजार में बेचने का काम करते थे।
एक बेटा विदेश में, एक रेलवे में... फिर भी पिता बना आरोपी
पुलिस की जांच में इस तार चोरी का कनेक्शन जबलपुर और सतना से भी जुड़ा है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि कबाड़ी लाला ताम्रकार का एक बेटा विदेश में है जबकि दूसरा रेलवे में था। पुलिस जब तार खरीदने वाले कबाड़ियों को पकड़ने गई तब आरोपी लाला ताम्रकार ने तार गलाने के सभी संसाधनों को जंगल में छिपा दिया था। पुलिस जब आरोपी को लेकर जंगल पहुंची तो वह खुद हैरान थी। तार को गलाने के लिए चीनी मिट्टी का घरियाए, हाथ पंखा, लोहे की करछुल, कई प्रकार के सांचा, पंखा समेत अन्य उपकरण को पुलिस ने बंद बोरी से जब्त किया है। आरोपियों ने यह भी बताया कि उन्होंने रेलवे की कई संपत्तियों का भी खरीदा है। जिसे गलाकर उन्होंने बर्तन का आकार देकर बाजार में बेच दिया है।
कर्ज ने बनाया चोर
आईटीआई के छात्र रहे दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी की इस वारदात को अंजाम देते थे। घर के लोगों ने समूह से कुछ कर्ज लिया था और अपनी कई प्रकार की जरूरतों के लिए वे बिजली तार काटने लगे। दोनों आरोपी पिछले दो सालों से इस वारदात को अंजाम दे रहे थे। तार काटने के बाद उससे मिले पैसे जब इनके पास से खत्म हो जाते थे तब ये अगली घटना को अंजाम देते थे। शहडोल, उमरिया और अनुपपुर जिले में बिजली तार चोरी की 50 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं। जिनमें से अधिकांस वारदात को आरोपियों ने करना स्वीकार किया है।