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MP News: सतना जिला अस्पताल ब्लड बैंक की लापरवाही, चार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ा एचआईवी संक्रमित रक्त

Tue, 16 Dec 2025 02:40 PM IST
सतना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना

सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि ब्लड बैंक की घोर लापरवाही के चलते थैलेसीमिया जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे चार मासूम बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया। यह मामला लगभग चार महीने पुराना बताया जा रहा है, जो अब सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

इलाज के नाम पर जानलेवा संक्रमण
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को जीवित रहने के लिए नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाना पड़ता है। इसी उपचार प्रक्रिया के तहत चारों बच्चे जिला अस्पताल पहुंचे थे। वहां उन्हें लापरवाही के चलते एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ा दिया गया। बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के बाद परिजनों में आक्रोश और भय का माहौल है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की इस लापरवाही ने उनके बच्चों का पूरा भविष्य अंधेरे में डाल दिया है।



बिना जांच कैसे चढ़ा दिया गया ब्लड?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार किसी भी मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और सिफलिस जैसी बीमारियों की जांच अनिवार्य होती है। अगर बच्चों को अस्पताल से चढ़ाए गए रक्त के कारण एचआईवी हुआ है, तो यह साफ तौर पर ब्लड बैंक की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। चार बच्चों के संक्रमित होने से यह भी स्पष्ट है कि मामला केवल एक यूनिट का नहीं, बल्कि कम से कम चार यूनिट एचआईवी पॉजिटिव ब्लड का है।

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रक्तदाताओं का अब तक नहीं लगा सुराग
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि चार महीने बीत जाने के बावजूद एचआईवी संक्रमित रक्तदाताओं की पहचान नहीं हो सकी है। प्रोटोकॉल के अनुसार जैसे ही किसी मरीज में एचआईवी की पुष्टि होती है, संबंधित ब्लड डोनर और उसकी पूरी चेन को तत्काल ट्रेस कर जांच की जानी चाहिए थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन, ब्लड बैंक और एचआईवी नियंत्रण के लिए बने आईसीटीसी सेंटर ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

अन्य मरीजों की भी जांच जरूरी
इसी ब्लड बैंक से गर्भवती महिलाओं सहित कई अन्य मरीजों को भी रक्त उपलब्ध कराया गया था, जो एक बार इलाज के बाद दोबारा अस्पताल नहीं लौटे। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि उनमें से कुछ लोग भी एचआईवी संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संभावित खतरे को देखते हुए सभी संबंधित मरीजों की तत्काल स्क्रीनिंग कराई जानी चाहिए।

प्रशासन हरकत में, रिपोर्ट तलब
मामले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। साथ ही ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

जवाबदेही और कार्रवाई की मांग
इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को न्याय और समुचित इलाज कब तक मिल पाता है। फिलहाल यह मामला पूरे प्रदेश में चिंता और आक्रोश का विषय बना हुआ है।

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