सतना जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला अस्पताल सतना में 108 एंबुलेंस की तकनीकी खराबी उस समय सामने आई, जब एंबुलेंस का गेट लॉक हो गया और शव को बाहर निकालने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रामनगर निवासी 67 वर्षीय राम प्रसाद पिता रामदयाल को अचानक तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। डॉक्टरों द्वारा सतना जिला अस्पताल रेफर किए जाने के बाद, रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। जब एंबुलेंस जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुंची और शव को नीचे उतारने की तैयारी की गई, तभी एंबुलेंस का गेट लॉक हो गया। कई बार प्रयास करने के बावजूद दरवाजा नहीं खुल सका। स्थिति को देखते हुए एंबुलेंस चालक को खिड़की के रास्ते अंदर जाना पड़ा और काफी प्रयास के बाद गेट को खोला जा सका। इसके बाद शव को बाहर निकाला गया।
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परिजनों में आक्रोश, व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के दौरान मौजूद परिजनों ने एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की नियमित जांच नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बनी। यदि मरीज जीवित होता, तो यह तकनीकी खामी और भी गंभीर परिणाम ला सकती थी।
मौत के बाद परिजन शव लेकर लौटे
जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिजन शव को रामनगर वापस ले गए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बना रहा।