डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर परिवार ने शहरवासियों के साथ-साथ इस मांग को बुलंद किया है कि सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक महान शिक्षाविद् कानूनविद् दानवीर डॉक्टर सर हरिसिंह गौर को भारत रत्न मिलना चाहिए। 26 नवंबर को डॉ. सर हरिसिंह गौर की 155वीं जयंती है। इसको गौर गौरव सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विविध सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
डॉक्टर हरिसिंह गौर ने शिक्षा के मंदिर सागर विश्वविद्यालय के लिए अपनी जीवन भर की पूरी कमाई दान कर दी थी। सारे विश्व में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा। डॉक्टर हरिसिंह गौर ने अपनी इस पूंजी से मध्यप्रदेश के पहले विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। उनकी 155वीं जयंती पर शहर के सभी प्रबुद्धजन सहित राजनैतिक गैर राजनीतिक तथा आम लोगों की मांग है कि डॉक्टर हरिसिंह गौर को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया जाए।
भारत रत्न की मांग का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने भी कहा है कि विश्विद्यालय प्रशासन अपने संस्थापक को भारत रत्न दिए जाने की मांग का पुरजोर समर्थन करता है। कुलपति ने कहा कि डॉ. गौर को भारत रत्न मिलना ही चाहिए। वह एक लेखक, विचारक, कानूनविद्, समाज सुधारक और महान दानवीर थे। उनके संघर्ष एवं त्याग की मिसाल अन्य कहीं नहीं देखने को मिलता है। वह हमारे पितृ पुरुष हैं। ऐसे महान स्वप्नद्रष्टा और मनीषी को भारत रत्न अवश्य मिलना चाहिए। हम सब उन्हें भारत रत्न दिलाने में जरूर सफल होंगे।