मऊगंज जिले की कुख्यात दामोदरगढ़ घाटी पर एक बार फिर भयानक हादसा हुआ। रविवार की सुबह केमिकल से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसा इतना गंभीर था कि ट्रक दो हिस्सों में बंट गया और उसमें भरा केमिकल जंगल में चारों ओर फैल गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घाटी में करीब 40 डिग्री का खतरनाक मोड़ और फिसलन भरा ढलान होने के कारण वाहन चालक अक्सर नियंत्रण खो देते हैं। यही वजह रही कि ट्रक का स्टीयरिंग और ब्रेक अचानक फेल हो गया। बेकाबू वाहन कई फीट तक घिसटता हुआ चट्टान से टकराया और पलटते हुए गहरी खाई में समा गया।
इस हादसे के बीच सबसे बड़ी उम्मीद की किरण बनी डायल-112 की टीम। टीम ने अपनी जान दांव पर लगाकर घायल चालक और उसके साथी को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। जानकारी मिलते ही आरक्षक सुरेश यादव, चालक राम आश्रय और स्टाफ भूपेंद्र बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे और 100 फीट गहरी दुर्गम खाई में उतर गए। ट्रक के क्षत-विक्षत केबिन में फंसे दोनों घायलों को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस की मदद से तत्काल मऊगंज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घाटी अब “मौत की घाटी” नाम से जानी जाती है। कुछ ही दिनों पहले इसी स्थान पर एक और ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इसके बावजूद यहां न तो चेतावनी बोर्ड न स्पीड ब्रेकर और न ही सुरक्षात्मक बैरिकेडिंग की व्यवस्था है। हर हादसे के बाद प्रशासन जागता है, लेकिन कुछ दिनों में फिर सब कुछ पुरानी स्थिति में लौट जाता है।