मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की सुठालिया में अवैध रूप से संचालित फर्नीचर के कारोबार पर तीन जिलों के संयुक्त दलों द्वारा कड़ा प्रहार कर लकड़ी माफियाओं की कमर तोड़ दी। यह कार्रवाई भोपाल मुख्यालय के निर्देश पर विदिशा, राजगढ़ और गुना वन विभाग की संयुक्त टीमों के द्वारा की गई है। कार्रवाई से पहले मध्यप्रदेश के तीन वन मंडल अधिकारियों के द्वारा संयुक्त रूप से विदिशा के लटेरी स्थित चन्देरी रेस्ट हाउस में एक बैठक आयोजित कर इसको अंजाम दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान राजगढ़ वनमंडल अधिकारी बेनी प्रसाद, विदिशा डीएफओ हेमंत यादव सहित गुना वनमंडल अधिकारी शामिल हुए थे।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई की भनक सागौन माफियाओं को ना लग सके, इस लिए पहले तीनों जिले के फॉरेस्ट डीएफओ ने विदिशा स्थित चन्देरी रेस्ट हाउस पर वन विभाग की टीमों को तेंदूपत्ता संग्रहण कार्यक्रम के नाम पर एकत्रित किया। वहां सभी वन कर्मचारी और अधिकारियों के मोबाइल फोन स्वीच ऑफ कराकर जब्त कर लिए गए, फिर एक साथ राजगढ़ के सुठालिया में कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस दौरान भारी मात्रा में सागौन की लकड़ी के साथ ही फर्नीचर बनाने के लिए उपयोग में लाई गई लड़कियों के साथ साथ मशीनों को भी जब्त किया गया है। जिसमें बड़ी मात्रा में बना हुआ फर्नीचर भी शामिल है।
इस पूरी कार्रवाई में 3 जिलों के 500 से अधिक वन अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त रूप से शामिल थे। इधर, मामले को लेकर विदिशा डीएफओ हेमंत यादव ने बताया कि ज्यादातर सागौन की लकड़ी विदिशा जिले के लटेरी क्षेत्र से राजगढ़ जिले के सुठालिया में जाती है। इस आधार पर जब्त किए गए सभी माल और लकड़ी को विदिशा जिले के लटेरी में लाया गया। साथ ही जब्त माल को सुरक्षित रखा गया है। डीएफओ हेमंत यादव ने बताया है कि पकड़ी गई सागौन की कीमत 1 करोड़ रुपए से ऊपर जाने की संभावना है।