मध्यप्रदेश के रायसेन वन मंडल में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वन विभाग की 17 से 19 फरवरी तक की गणना में 944 गिद्ध पाए गए। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक है। पिछले साल केवल 314 गिद्ध मिले थे। वन विभाग की 16-17 विशेष टीमें प्रतिदिन सुबह 7 से 9 बजे तक जंगलों का सर्वेक्षण करती थीं। डीएफओ विजय कुमार और एसडीओ सुधीर पटले स्वयं इस गणना का नेतृत्व कर रहे थे। रायसेन वन मंडल के पूर्व, पश्चिम और सिलवानी वन परिक्षेत्र में छह प्रजातियों के गिद्ध मिले। इनमें लॉन्ग बिल्ड, व्हाइट ड्रम, हिमालयन, यूरेशियान, रेड अलर्ट और इजिप्शियन गिद्ध शामिल हैं। एसडीओ सुधीर पटले ने बताया कि वन विभाग इन दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। गिद्धों की सुरक्षा और संख्या में वृद्धि के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। गिद्धों की बढ़ती संख्या वन विभाग के संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
बता दें सम्पूर्ण प्रदेश में 17 फरवरी से गिद्दों की गणना की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि उनकी क्या स्थिति है। इसका उद्देश्य है कि उनकी स्थिति का पता लगाया जा सके। यह गणना साल में दो बार होगी। पहली गणना सर्दियों में और दूसरी गणना गर्मियों में। उसी क्रम में रायसेन के जंगल में वन विभाग की टीम के द्वारा भी 17 से 19 फरवरी तक गिद्दों की गणना की गई, जिसमें फॉरेस्ट की टीम को गिद्दों की संख्या में बढ़ोतरी मिली है।
रायसेन फॉरेस्ट के एसडीओ सुधीर पटेल के अनुसार मध्यप्रदेश को टाइगर, चीता और तेंदुए का गढ़ माना जाता है, लेकिन अब गिद्धों की बढ़ती आबादी के लिए भी जाना जाएगा। 17 से 19 फरवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में राज्य भर में गिद्धों की गणना की गई है। यह गणना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछली दो गणनाओं में मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की गई थी। वन विभाग का अनुमान है कि राज्य में गिद्धों की संख्या 10 हजार से भी अधिक है।