मध्यप्रदेश के नीमच जिले में आंगनवाड़ी में कार्यरत रसोईया की दुखद मौत के मामले में स्थानीय जिला प्रशासन ने मौत के कारणों को छिपाने का प्रयास किया है। जनसंपर्क अधिकारी द्वारा एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि कंचनबाई की मृत्यु आंगनवाड़ी के बच्चों को बचाने में नहीं हुई है। जैसे ही प्रशासन द्वारा यह प्रेस नोट जारी किया तो बवाल मच गया। स्थानीय प्रशासन की कड़े शब्दों में निंदा हुई और बात भोपाल तक पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को एक्स और फेसबुक पर पोस्ट अपलोड की है। इसमें बताया गया कि सरकार बहन कंचनबाई के परिजनों के साथ खड़ी है।
मध्यप्रदेश के नीमच में बीते दिनों एक घटना हुई थी, जिसमें जिले के रानपुर गांव में मधुमक्खियों के हमले से बचाते-बचाते आंगनवाड़ी केंद्र रानपुर में खाना बनाने वाली कंचनबाई खुद मौत का शिकार बन गई। यह खबर जब मीडिया पर उछली तो स्थानीय महिला बाल विकास के अधिकारियों ने मौत के कारणों पर पर्दा डालने की कोशिश की और बताया गया कि कंचनबाई की मृत्यु आंगनवाड़ी के बच्चों को बचाने के दौरान नहीं हुआ है। जैसे ही जिला प्रशासन के इस नकारने वाले प्रेस नोट की सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी और मामला प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस संवेदनशील मामले में तुरंत एक्शन लिया है।
एक्स और फेसबुक प्लेटफॉर्म पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने लिखा है कि नीमच जिले के ग्राम रानपुर में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी में कार्यरत बहन कंचन बाई मेघवाल का असमय निधन अत्यंत दुखद व हृदयविदारक है। प्रदेश सरकार इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है। इस घटना में मानवीय आधार पर मैंने कंचन बहन के परिवार को चार लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति दें।
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प्रेस नोट में यह लिखा था प्रशासन ने
दिनांक 02 फरवरी सोमवार को आंगनवाड़ी केंद्र रानपुर परियोजना जावद में स्व सहायता समूह की अध्यक्ष कंचन बाई की आंगनवाड़ी के बच्चों को मधुमक्खी के हमले से बचाने में हुई मृत्यु की घटना के सम्बन्ध में वस्तुस्थिति निम्नानुसार है-
परियोजना अधिकारी जावद आभा पाटीदार से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम रानपुर में आंगनवाड़ी केंद्र संचालित है और आंगनवाड़ी भवन के पास ही प्राथमिक शाला भवन है, परंतु प्राथमिक शाला भवन बच्चों हेतु उपर्युक्त नहीं है और जर्जर स्थिति में है। इस कारण आंगनवाड़ी भवन में ही प्राथमिक शाला संचालित होती है। दो फरवरी 26 सोमवार को दोपहर 03:30 बजे कंचनबाई आंगनवाड़ी भवन से लगभग 50 मीटर दूर बने हैंडपंप पर कपड़े धो रही थीं और मृतका के दोनों बच्चे पास ही खेल रहे थे। उसी समय मधुमक्खियों ने मृतका पर हमला कर दिया। मधुमक्खी के हमले से बचने के लिए मृतका कंचनबाई ने आंगनवाड़ी भवन की ओर दौड़ लगाई। इस कारण मधुमक्खियां भवन की ओर आने लगीं। उस समय आंगनवाड़ी में प्रतिदिन की तरह प्राथमिक शाला संचालित हो रही थी। तब शिक्षिका मंगला मालवीय द्वारा शाला में मधुमक्खियों को आता देख तत्काल शाला में पढ़ रहे 20 बच्चो को दरी व तिरपाल से ढंक दिया, जिससे कि बच्चे सुरक्षित रहें। दोपहर 3:30 बजे कोई भी आंगनवाड़ी केंद्र का बच्चा वहां पर उपस्थित नहीं था बल्कि शाला संचालित हो रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संगीता मेघवाल एवं सहायिका विद्या मेघवाल ग्राम में कुपोषित बच्चे के घर गृहभेंट के लिए गई हुई थीं। घटना के बाद शिक्षिका मंगला मालवीय द्वारा मृतका के परिजन को घटना की सूचना दी और तत्पश्चात मृतका द्वारा वहां से घर की ओर प्रस्थान कर लिया गया। आंगनवाड़ी में बच्चों की उपस्थिति का समय दोपहर एक बजे तक ही निर्धारित है और उक्त समय प्रतिदिन की तरह प्राथमिक शाला आंगनवाड़ी भवन में संचालित हो रही थी।
कलेक्टर ने सीएम को करवाया अवगत, शाम को जारी हो गई पोस्ट—
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के अथक प्रयासों से मृत महिला व उनके बच्चों को आख़िरकार न्याय मिल गया। सीएम मोहन यादव ने X पर जानकारी दी कि मृत महिला के परिवार को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता व बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगा। बताया जा रहा है कि कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने इस मामले में विशेष रुचि दिखाकर सुबह से राज्य स्तर पर को-ऑर्डिनेट कर इस मामले में अंतिम मोहर लगवाने का काम किया है। जो भी कहानी हो, जो भी हकीकत हो, वह सब अपनी जगह, लेकिन कलेक्टर चंद्रा ने यह साफ कर दिया कि किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होगा।