नरसिंहपुर संस्कृत पाठशाला में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई अभद्रता की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से किसी को भी नहीं रोका जा सकता। हमें भी धार्मिक अधिकार प्राप्त हैं। सत्ता आती-जाती रहती है, पर सत्ता के अहंकार में ऐसा कार्य नहीं होना चाहिए जिसकी निंदा हो।
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उन्होंने कहा कि इस विवाद का मूल बिंदु यह स्पष्ट करना है कि शंकराचार्य का निर्णय प्रशासन नहीं करता। उन्होंने कहा, “गुरु-शिष्य परंपरा चलती है। हमारे गुरुदेव स्वरूपानंद सरस्वती जी ने हमें संन्यास दिया था। श्रृंगेरी के शंकराचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद जी का भी अभिषेक किया है और हमारा भी, ऐसे में प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं रहती।” धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं से जुड़े मामलों में प्रशासन को संवेदनशील रहते हुए विवाद पैदा करने से बचना चाहिए।
कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के नरसिंहपुर निवास पहुंचे, जहां मंत्री ने चरण पादुका पूजन किया। इस अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष सहित अन्य भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। शंकराचार्य ने वहां प्रवचन भी दिए।