नर्मदापुरम में सोमवार को किसानों के आंदोलन ने उस समय बड़ा रूप ले लिया, जब संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 15 किसान संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर भोपाल कूच के लिए सेठानी घाट पर जुटे। किसानों ने मूंग की पूरी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीदने सहित कई मांगों को लेकर मुख्यमंत्री निवास तक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया था। लेकिन पदयात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
किसानों और प्रशासन के बीच बढ़े तनाव के बाद मौके पर जमकर नारेबाजी हुई। आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान सिर्फ आश्वासन से नहीं, बल्कि ठोस फैसलों से होना चाहिए। किसान नेताओं का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में मूंग की सिर्फ 25 प्रतिशत उपज ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही है, जबकि बड़ी मात्रा में फसल किसानों को मजबूरी में कम दामों पर खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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किसानों की प्रमुख मांग है कि मूंग की 100 प्रतिशत उपज MSP पर खरीदी जाए। इसके साथ ही खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को सरल बनाने और खेती के लिए प्रतिदिन 10 घंटे नियमित बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी आंदोलन में उठाई गई। किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों के भोपाल कूच को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर के प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया। भोपाल-बुधनी रोड स्थित डोंगरवाड़ा तिराहे पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस. थोटा खुद मौके पर मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी। सुरक्षा व्यवस्था के चलते भोपाल चौराहे पर यातायात को भी नियंत्रित किया गया।
किसानों का कहना है कि अगर जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। वहीं प्रशासन की कोशिश है कि कानून व्यवस्था बनी रहे और स्थिति शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित की जा सके।