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MP: संरक्षित काले हिरण के कथित शिकार प्रकरण में कार्रवाई, रेंजर सहित छह वनकर्मी निलंबित; मिले थे ये संकेत

Tue, 24 Feb 2026 04:31 PM IST
नर्मदापुरम ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सिवनीमालवा वन परिक्षेत्र से वन्यजीव संरक्षण को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। संरक्षित वन्यजीव काले हिरण के कथित शिकार प्रकरण में रेंजर सहित छह वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में लापरवाही और तथ्य छिपाने के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। 21 जनवरी 2026 को सामने आई इस घटना को प्रारंभ में प्राकृतिक मौत बताकर दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि मामला संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का नहीं, बल्कि सुनियोजित शिकार का है। घटनास्थल पर एक हिरण जिंदा मिला, जिसके पैर बंधे हुए थे, जबकि दूसरा हिरण मृत अवस्था में पड़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि हिरणों को पकड़कर कहीं ले जाने की योजना बनाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि महत्वपूर्ण जैविक नमूनों को सुरक्षित रखने के बजाय नष्ट कर दिया गया। साथ ही मामले में गंभीर धाराएं नहीं जोड़ी गईं और आरोपियों की पहचान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिससे प्रकरण को दबाने की आशंका और गहरा गई। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में तथ्य छिपाने और गंभीर लापरवाही की पुष्टि होने के बाद परिक्षेत्र अधिकारी आशीष रावत, वनपाल महेश गौर, वनरक्षक मनीष गौर, रूपक झा, ब्रजेश पगारे और पवन उइके को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है।

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सीसीएफ अशोक कुमार चौहान ने स्वीकार किया कि काले हिरण शिकार मामले में संबंधित वनकर्मियों से गंभीर चूक हुई है और जांच में लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सिवनीमालवा का यह काला हिरण शिकार कांड अब केवल वन्यजीव अपराध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विभागीय जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी की भी बड़ी परीक्षा बन गया है। वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण कार्यकर्ताओं की नजर अब इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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