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Khandwa: स्व सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रहीं हर्बल कलर, विदेशों में भी है डिमांड, जानें कैसे बनता है रंग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा Updated Thu, 13 Mar 2025 08:46 PM IST

देशभर में शुक्रवार को रंगों का पर्व होली मनाया जाएगा। हालांकि, बाजार में उपलब्ध केमिकल युक्त रंग और गुलाल इस त्योहार की खुशियों को फीका कर सकते हैं। इन्हीं हानिकारक रंगों से बचाव के लिए लोगों का रुझान हर्बल रंगों की ओर बढ़ रहा है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की महिला स्व सहायता समूह ने प्राकृतिक गुलाल का उत्पादन शुरू किया है, जिसे फूलों और प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जा रहा है। अब यह हर्बल गुलाल खंडवा से लेकर विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।

प्राकृतिक अवयवों से तैयार हर्बल रंग
खंडवा जिले के पंधाना ब्लॉक में महिला स्व सहायता समूह ने पहली बार चुकंदर, देसी हल्दी, पलाश के फूल और मोरिंगा की पत्तियों से हर्बल कलर तैयार किया है। यह प्राकृतिक रंग लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक हर्बल कंपनी ने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए 400 किलो गुलाल की खरीद की है।

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इस पहल से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिला है। अब यह कंपनी इस हर्बल गुलाल को विदेशों में भी ऊंचे दामों पर बेच रही है। हर्बल रंग तैयार करने वाली महिला समूह की कला बामने का कहना है कि, बाजार में अब तक सिंथेटिक रंग ही उपलब्ध थे, लेकिन हमने इस बार हल्दी और पलाश के फूलों से प्राकृतिक रंग बनाया है, जो हमारी पहली सफलता है।



कैसे तैयार किया गया हर्बल गुलाल?
खंडवा, पंधाना और खालवा की महिला स्व सहायता समूहों ने मिलकर चार क्विंटल हर्बल रंग तैयार किया है। इस प्रक्रिया में चुकंदर का रस, देसी हल्दी और मोरिंगा की कच्ची पत्तियों को बारीक पीसकर उबाला गया। तैयार अर्क को सुखाकर आरारोट मिलाया गया, जिससे यह गुलाल के रूप में उपयोगी बने। इस हर्बल रंग को शहर में लगाए गए विशेष स्टॉलों पर बेचा जा रहा है, जहां लोग इसे बड़े उत्साह से खरीद रहे हैं।

केमिकल युक्त रंगों के दुष्प्रभाव
जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि बाजार में सस्ते केमिकल युक्त रंगों की भरमार है, जो त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक होते हैं। इनसे त्वचा रोग, एलर्जी और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए प्राकृतिक रंगों को अपनाना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक है।

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फॉरेस्ट डिपार्टमेंट भी बना रहा हर्बल कलर
वन विभाग भी इसी दिशा में कार्य कर रहा है। जिला कलेक्टर ने लोगों से अपील की कि वे हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें, ताकि केमिकल रंगों के दुष्प्रभावों से बचा जा सके और महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। साथ ही, उन्होंने गौशालाओं से प्राप्त कंडों का उपयोग कर होलीका दहन करने का सुझाव दिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके।

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