इस समय प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के शाही स्नान की तर्ज पर ही बुधवार को मनाई जा रही मौनी अमावस्या पर्व के इस शुभ अवसर पर मध्यप्रदेश के खरगोन जिले स्थित बड़वाह के नवघाट खेड़ी के नर्मदा तट पर अमृत स्नान का महाआयोजन किया गया था। इस दौरान नगर के वेदपाठी पंडितों ने बड़वाह के समीप बसे नावघाट खेड़ी नर्मदा तट पर शोभायात्रा निकाल कर एक साथ विधि-विधान के साथ नर्मदा स्नान किया।
नर्मदा स्नान के इस महाआयोजन के दौरान क्षेत्र के आम नागरिकों ने भी इस अमृत स्नान में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। यहां सुबह से ही नर्मदा के तट पर स्थित वेदपाठी पंडित, बैंड बाजे एवं ढोल के साथ राधाकृष्ण मंदिर से निकले। इस दौरान करीब 50 से अधिक वैदिक ब्राह्मण एवं आम श्रद्धालु सहित करीब 200 लोग इस आयोजन में सम्मिलित हुए। यहां से श्रद्धालु अपने साथ भगवान श्रीकृष्ण को भी पालकी में विराजित कर डोले के रूप में साथ ले गए।
वहीं भजनों पर झूमते हुए ये सभी नावघाट खेड़ी के नर्मदा तट पहुंचे, जिसके बाद सभी वैदिक पंडितों ने एक साथ मंत्रोच्चार कर तीर्थराज प्रयागराज सहित पावन गंगा मैया का आव्हान करते हुए दूध से नर्मदा का अभिषेक भी किया, जिसके बाद विधि-विधान से पूजन अर्चन कर बेहद श्रद्धाभाव के साथ नर्मदा में डुबकी लगाई। यहां सभी ने हर-हर गंगे व मात नर्मदे हर के जयघोष के साथ नर्मदा में डुबकी लगाई। इस दौरान कुछ समय के लिए नर्मदा तट का यह दृश्य भी इस तरह नजर आ रहा था। मानो नर्मदा का यह किनारा प्रयागराज में जारी महाकुंभ के संगम का घाट हो, और यहां मौजूद सभी ने बेहद ही उत्साह व श्रद्धापूर्वक नर्मदा स्नान का आनंद लिया।
श्रद्धालुओं को प्राप्त हो कुंभ स्नान का फल
वहीं, इस स्नान को लेकर जानकारी देते हुए पंडित प्रीतेश व्यास ने बताया कि प्रयागराज में जारी महाकुंभ की गूंज अब भारत तक ही सीमित नहीं है। बल्कि वह विश्वव्यापी हो गई है। आज केवल भारतवासी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व से भारत आए श्रद्धालु कुंभ में पहुंचकर, यहां पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बन रहे हैं। लेकिन जो लोग किसी असमर्थता के कारण इस समय प्रयागराज तक नहीं पहुंच पाए हैं या प्रशासन भीड़ के चलते यदि वहां आने से मना कर रहा है। तब इसी स्थिति को देखते हुए ही मौनी अमावस्या के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को कुंभ स्नान का फल प्राप्त हो। इस उद्देश्य के साथ आज यहां नर्मदा तट पर एकत्र होकर महास्नान किया गया है। यहां स्नान के दौरान बड़ी संख्या में वेदपाठी पंडितों सहित अन्य श्रद्धालु भी जो तट पर स्नान के लिए आए थे, वो भी इस जत्थे में शामिल हुए थे।