खरगोन नगर का रावण दहन का मुख्य आयोजन नवग्रह मेला मैदान पर हुआ, जहां 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का देर शाम दहन हुआ। हालांकि बीते दो दिनों से लगातार हो रही बरसात के बाद रावण दहन के इस कार्यक्रम पर पूरे निमाड़ में ही संशय बना हुआ था। लेकिन दोपहर बाद जब बादल छंटने लगे, तब रावण दहन के आयोजन की समिति के साथ ही आम लोगों में भी खुशी की लहर दौड़ उठी। बता दें कि इस बार रावण को राजसी ठाठ बांट के बजाय पारंपरिक वेषभूषा जिनमें धोती, कुर्ता थे, वह पहनाकर श्रीराम के सामने खड़ा किया गया था।
इस दौरान बलशाली लंकापति रावण का पुतला हाथ में तलवार लिए अट्टाहास करते हुए अपने अहंकार को दर्शा रहा था, लेकिन उसका अहंकार श्रीराम का बाण नाभि में लगते ही चुर चुर हो गया। देखते ही देखते पलभर में ही 51 फीट ऊंचा रावण का पुतला धूं धूं कर जल उठा। वहीं रावण दहन से पूर्व रतलाम से आई टीम ने रंगारंग आतिशबाजी कर लोगों का मनोरंजन भी किया।
इस वर्ष नहीं निकली शोभायात्रा
खरगोन नगर में विजयदशमी पर्व पर हर वर्ष रावण दहन से पहले परंपरागत रुप से पहाड़सिंगपुरा स्थित कलश चौक से श्रीराम, लक्ष्मण और हुनमानजी की शोभायात्रा निकाली जाती रही है, लेकिन इस बार यह शोभायात्रा नहीं निकाली गई। इसको लेकर समाज के अध्यक्ष दीपक डंडीर ने बताया कि विजयादशमी पर ही रघुवंश राजपूत समाज के गुरुवर विजयरामदास महाराज अयोध्या ब्रह्मलीन हो गए। जिससे समूचे समाज में शोक की लहर व्याप्त है। चुंकि रघुवंशी समाज द्वारा रावण दहन की परंपरा रही है, इसलिए समाज के श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान के रुप में युवा दहन स्थल पर सादगी के साथ पहुंचे हैं। वहीं इस बार रामजी की सेना के रुप में निकाली जाने वाली शोभायात्रा नहीं निकाली गई।