मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े के मामले में सख्त कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एमपीएनआरसी) के अध्यक्ष जितेश चंद्र शुक्ला और रजिस्ट्रार अनीता चंद्र को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने के आदेश दिए हैं। जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस ए.के. पालीवाल की युगलपीठ ने चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि इन अधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया तत्काल पूरी करें। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अधिकारी, जो मान्यता देने की पिछली प्रक्रियाओं में शामिल रहे हैं, महत्वपूर्ण पदों पर बने रहकर जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
यह आदेश लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि कई नर्सिंग कॉलेजों को नियमों का उल्लंघन करते हुए मान्यता दी गई, जिसमें अनीता चंद्र और जितेश चंद्र शुक्ला की भूमिका रही। विशेष रूप से, भोपाल के एक कॉलेज को अनीता चंद्र की रिपोर्ट के आधार पर मान्यता दी गई थी, जबकि वह निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता था। बाद में, इस कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी गई।
सीबीआई जांच के दौरान भी यह बात सामने आई कि कई कॉलेज बिना मानकों को पूरा किए मान्यता प्राप्त कर चुके थे। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों का पद पर बने रहना साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और जांच को बाधित करने का कारण बन सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने कोर्ट में पैरवी की। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच में तेजी लाने और मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर को करने का निर्देश दिया है।