राष्ट्रीय भारतीय छात्र संगठन ने विगत दिवस रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए जानें की मांग संबंधी पोस्टर लगाए थे। कुलसचिव के द्वारा इस संबंध में सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने एक एनएसयूआई कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से आरोपी को जमानत का लाभ मिल गया है।
सिविल लाइन थाना प्रभारी नेहरू खंडाते से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक फरवरी को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में एक संगठन के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए थे। विवादित पोस्ट में उक्त संगठन को संविधान विरोध सोच, आरक्षण विरोधी सोच, राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान, महिला विरोधी मानसिकता, ईसाई-मुस्लिम वर्ग सहित अल्पसंख्यकों पर हमला, शिक्षा बजट में कटौती का उल्लेख करते हुए आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कुलपति की शिकायत पर चार एनएसयूआई कार्यकर्ता के खिलाफ नामजद तथा अन्य अज्ञात आरोपियों के प्रकरण दर्ज कर लिया था।
पुलिस ने अमित मिश्रा नामक एक कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने आरोपी को जमानत का लाभ मिल गया है। पुलिस के द्वारा अन्य जमानत और अज्ञात आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को सुरक्षित करवाया गया है, जिससे अन्य अज्ञात आरोपियों की शिनाख्त सुनिश्चित की जा सके। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने थाने पहुंच पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि संविधान ने हमें विरोध प्रदर्शन का अधिकार प्रदान किया है। सत्ता पार्टी के दबाव में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर गलत तरीके से प्रकरण दर्ज किया गया है।
युवक कांग्रेस नेता अधिवक्ता श्रीकांत विष्वकर्मा का कहना है कि पुलिस ने धारा-299 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पोस्टर में एक संगठन के खिलाफ प्रतिबंध लगाने संबंधित मांग की गई है। धार्मिक भावना भड़काने का मामला विधि विरुद्ध तरीके से दबाव में दर्ज किया गया है।